ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1596 of 1855
Read in contextसूक्त—२६ देवता—पूषा
प्र ह्यच्छा मनीषाः स्पार्हा यन्ति नियतः. प्र दस्रा नियुद्रथः पूषा अविष्टु माहिनः.. (१)
हमारे अभिलाषा योग्य एवं नियमित स्तुतिवचन पूषादेव को प्राप्त करने के लिए भली
प्रकार जाते हैं. दर्शनीय, जाने के लिए सदा रथ जोड़ने वाले एवं महान् पूषादेव आकर हमारी
रक्षा करें. (१)
यस्य तन्महित्वं वाताप्यमयं जनः. विप्र आ वंसद्धीतिभिश्निकेत सुष्टुतीनाम्.. (२)
यह मेधावी यजमान सूर्यमंडल में स्थित महान् जलसमूह को यज्ञक्रिया द्वारा धरती पर
लावें. पूषादेव यजमान की शोभन स्तुतियां जानें. (२)
स वेद सुष्टुतीनामिन्दुर्न पूषा वृषा. अभि प्सुरः प्रुषायति व्रजं न आ प्रुषायति.. (३)
सोम के समान रस बरसाने वाले पूषादेव शोभन स्तुतियों को जानते हैं. सुंदर पूषा हम
पर जल बरसाते हैं एवं हमारी गोशाला को सींचते हैं. (३)
मंसीमहि त्वा वयमस्माकं देव पूषन्. मतीनां च साधनं विप्राणां चाधवम्.. (४)
हे अभिलाषाओं को पूरा करने वाले एवं बुद्धिमानों को भी कंपित करने वाले पूषादेव!
हम तुम्हारी स्तुति करते हैं. (४)
प्रत्यर्धिर्यज्ञानामश्वहयो रथानाम्. ऋषिः स यो मनुर्हितो विप्रस्य यावयत्सखः.. (५)
यज्ञों के आधे भाग के भागी, रथों में घोड़ों के द्वारा चलने वाले, सबको देखने वाले एवं
मानवों के हितैषी पूषादेव शत्रुओं को दूर भगाने वाले मित्र हैं. (५)
आधीषमाणायाः पतिः शुचायाश्च शुचस्य च.
वासोवायोऽवीनामा वासांसि मर्मृजत्.. (६)
संतान उत्पन्न करने में समर्थ बकरी और बकरे के स्वामी पूषा भेड़ के बालों के
दशापवित्र नामक वस्त्र बुनते हैं एवं शुद्ध करते हैं. (६)
इनो वाजानां पतिरिनः पुष्टीनां सखा. प्र श्मश्रु हर्यतो दूधोद्वि वृथा यो अदाभ्यः.. (७)
ईश्वर पूषा अन्नों के स्वामी एवं पुष्टिकारक वस्तुओं के मित्र हैं. शत्रुओं द्वारा अपराजेय
पूषा अपने अभिलषित यजमान का सोमरस पीकर अनायास ही अपनी दाढ़ी को हिलाते हैं.
(७)
आ ते रथस्य पूषन्नजा धुरं ववृत्युः. विश्वस्यार्थिनः सखा सनोजा अनपच्युतः.. (८)
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