ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1590 of 1855
Read in contextययोर्देवो न मर्त्यो यन्ता नकिर्विदाय्यः.. (५)
हे इंद्र! तुम अपने आप उन वायु वेग से युक्त एवं सरल मार्ग पर चलने वाले घोड़ों को
हांकते हुए हमारे सामने आते हो, जिनको हांकने वाला अथवा जिनकी शक्ति जानने वाला
देव अथवा मनुष्य कोई भी नहीं है. (५)
अध ग्मन्तोशना पृच्छते वां कदर्था न आ गृहम्.
आ जग्मथुः पराकाद्दिवश्च ग्मश्च मर्त्यम्.. (६)
हे इंद्र एवं अग्नि! अपने स्थान को जाते हुए तुमसे उशना ऋषि ने पूछा— “तुम लोग
किस लिए हमारे घर आए हो? तुम इतनी अधिक दूर द्युलोक और धरती से हमारे घर केवल
अनुग्रहवश आते हो.” (६)
आ न इन्द्र पृक्षेसेऽस्माकं ब्रह्मोद्यतम्. तत्त्वा याचामहेऽवः शुष्णं यद्धन्नमानुषम्.. (७)
हे इंद्र! हमारे द्वारा एकत्रित इस यज्ञ सामग्री का तुम तब तक भक्षण करो, जब तक
तुम्हें तृप्ति न मिले. हम तुमसे अन्न, रक्षा एवं ऐसी शक्ति चाहते हैं, जिससे तुम राक्षसों का
विनाश करते हो. (७)
अकर्मा दस्युरभि नो अमन्तुरन्यव्रतो अमानुषः.
त्वं तस्यामित्रहन्वधर्दासस्य दम्भय.. (८)
हे इंद्र! हमारे चारों ओर यज्ञकर्म से शून्य, किसी को न मानने वाले, वेदस्तुति के
प्रतिकूल कर्म करने वाले एवं मानवोचित व्यवहार से रहित दस्यु हैं. हे शत्रुनाशक इंद्र! तुम शूर
मरुतों के साथ हमारी रक्षा करो. (८)
त्वं न इन्द्र शूर शूरैरुत त्वोतासो बर्हणा. पुरुत्रा ते वि पूर्तयो नवन्तक्षोणयो यथा.. (९)
हे शूर इंद्र! तुम शूर मरुतों के साथ हमारी रक्षा करो. तुम्हारे द्वारा रक्षित हम शत्रुविनाश
में समर्थ बनें. तुम्हारे दिए हुए अभिलषित पदार्थ स्तोता को इस प्रकार घेरते हैं, जिस प्रकार
सेवक अपने स्वामी को घेरते हैं. (९)
त्वं तान्वृत्रहत्ये चोदयो नॄन्कार्पणे शूर वज्रिवः.
गुहा यदी कवीनां विशां नक्षत्रशवसाम्.. (१०)
हे वज्रधारी एवं शूर इंद्र! तुम युद्ध में शत्रुनाश के लिए प्रसिद्ध मरुतों को उस समय
प्रेरित करते हो, जिस समय स्तोताओं की नक्षत्रवासी देवों के प्रति बोली हुई स्तुतियां सुनते
हो. (१०)
मक्षू ता त इन्द्र दानाप्रस आक्षाणे शूर वज्रिवः.