ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1513 of 1855
Read in contextशुद्ध होते हुए सोम लहरों वाली नदी के समान मन से उत्पन्न स्तुतियों को प्रेरित करते हैं.
जल बरसाने वाले एवं गायों को जानने वाले सोम छिपी हुई वस्तुओं को देखते हुए दुर्बलों
द्वारा निवारण न करने योग्य बल का सहारा लेते हैं. (७)
स मत्सरः पृत्सु वन्वन्नवातः सहस्ररेता अभि वाजमर्ष.
इन्द्रायेन्दो पवमानो मनीषं१ शोरूर्मिमी Couch? -> wait, let me write exact Devanagari:
इन्द्रायेन्दो पवमानो मनीषं१ शोरूर्मिमी Couch -> No: इन्द्रायेन्दो पवमानो मनीषं१ शोरूर्मिमी Couch?
Let's transcribe line by line precisely:
शुद्ध होते हुए सोम लहरों वाली नदी के समान मन से उत्पन्न स्तुतियों को प्रेरित करते हैं.
जल बरसाने वाले एवं गायों को जानने वाले सोम छिपी हुई वस्तुओं को देखते हुए दुर्बलों
द्वारा निवारण न करने योग्य बल का सहारा लेते हैं. (७)
स मत्सरः पृत्सु वन्वन्नवातः सहस्ररेता अभि वाजमर्ष.
इन्द्रायेन्दो पवमानो मनीषं१ शोरूर्मिमी Couch? No: इन्द्रायेन्दो पवमानो मनीष