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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1512 of 1855

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Page 1512

के लिए कल्याणकारी बनाते हुए दूध आदि ग्रहण करते हैं. दूध आदि इंद्र के शीघ्र आगमन के
कारण हैं. (१)
समस्य हरिं हरयो मृजन्त्यश्वह्यैरनिशितं नमोभिः.
आ तिष्ठति रथमिन्द्रस्य सखा विद्वाँ एना सुमतिं यात्यच्छ.. (२)
उंगलियां हरे रंग वाले सोम का रस निचोड़ती हैं. सोम अपनी व्याप्त एवं नमित बनाने
वाली किरणों के साथ दशापवित्र रूप असंस्कृत रथ में बैठते हैं. इसके बाद इंद्र के मित्र एवं
विद्वान् सोम दशापवित्र से चलकर उत्तम स्तुतियों वाले स्तोता के पास पहुंचते हैं. (२)
स नो देव देवताते पवस्व महे सोम प्सरस इन्द्रपानः.
कृण्वन्नपो वर्षयन्द्यामुतेमामुरोरा नो वरिवस्या पुनानः.. (३)
हे दीप्तिशाली एवं इंद्र के पीने योग्य सोम! तुम देवों द्वारा विस्तृत हमारे यज्ञ में इंद्र के
उत्तम पान के लिए निचुड़ो. हे जल उत्पन्न करने वाले, द्यावा-पृथिवी को वर्षा से भिगाने वाले,
विस्तृत अंतरिक्ष से आते हुए एवं विशुद्ध होते हुए सोम! तुम धन आदि देकर हमारी सेवा
करो. (३)
अजीतयेऽहतये पवस्व स्वस्तये सर्वतातये बृहते.
तदुशन्ति विश्व इमे सखायस्तदहं वश्मि पवमान सोम.. (४)
हे सोम! हमारी विजय, अविनाश, अहिंसा एवं यज्ञ के लिए हमारे सामने आओ. मेरे
सब मित्र तुम्हारी रक्षा चाहते हैं. हे पवमान सोम! मैं भी तुम्हारी रक्षा चाहता हूं. (४)
सोमः पवते जनिता मतीनां जनिता दिवो जनिता पृथिव्याः.
जनिताग्नेर्जनिता सूर्यस्य जनितेन्द्रस्य जनितोत विष्णोः.. (५)
स्तुतियों, द्युलोक, पृथ्वी, अग्नि, सूर्य, इंद्र एवं विष्णु को उत्पन्न करने वाले सोम शुद्ध
होते हैं. (५)
ब्रह्मा देवानां पदवीः कवीनामृषिर्विप्राणां महिषो मृगाणाम्.
श्येनो गृध्राणां स्वधितिर्वनानां सोमः पवित्रमत्येति रेभन्.. (६)
ऋत्विजों के ब्रह्मा, कवियों की पदरचना करने वाले, बुद्धिमानों के ऋषि, जंगली
जानवरों के भैंसे, पक्षियों के बाज एवं अस्त्रों के स्वधिति सोम शब्द करते हुए दशापवित्र से
पार जाते हैं. (६)
प्रावीविपद्वाच ऊर्मिं न सिन्धुर्गिरः सोमः पवमानो मनीषाः.
अन्तः पश्यन्वूजनेमावराण्या तिष्ठति वृषभो गोषु जानन्.. (७)
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