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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1463 of 1855

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Page 1463

सोम उग्रों में अतिशय उग्र, शूरों में अतिशय शूर एवं अधिक दान करने वालों में महान्
हैं. (१७)
त्वं सोम सूर एषस्तोकस्य साता तनूनाम्. वृणीमहे सख्याय वृणीमहे युज्याय.. (१८)
हे शोभन वीर्य वाले सोम! हमें अन्न एवं पुत्र की संतानें दो. हम मैत्री और सहायता के
लिए तुम्हारा वरण करते हैं. (१८)
अग्न आयूंषि पवस आ सुवोर्जमिषं च नः. आरे बाधस्व दुच्छुनाम्.. (१९)
हे पवमान सोमरूप अग्नि! तुम हमारे जीवनों की रक्षा करते हो. तुम हमें बल तथा अन्न
दो एवं शत्रुओं को हमसे दूर रखकर पीड़ा पहुंचाओ. (१९)
अग्निर्ऋर्षिः पवमानः पाञ्चजन्यः पुरोहितः. तमीमहे महागयम्.. (२०)
अग्नि पांचों वर्णों के हितैषी, सबके द्रष्टा, पवित्र होते हुए पुरोहित एवं यजमानों द्वारा
स्तुत्य हैं. हम अग्नि से याचना करते हैं. (२०)
अग्ने पवस्व स्वपा अस्मे वर्चः सुवीर्यम्. दधद्रयिं मयि पोषम्.. (२१)
हे शोभन कर्म वाले अग्नि! तुम हमें शोभन शक्ति वाला तेज, धन एवं गाएं प्रदान करो.
(२१)
पवमानो अति स्रिधोऽभ्यर्षति सुष्टुतिम्. सूरो न विश्वदर्शतः.. (२२)
पवमान सोम शत्रुओं को हराते हैं, शोभन स्तुति सामने से स्वीकार करते हैं एवं सूर्य के
समान सबको देखते हैं. (२२)
स मर्मृजान आयुभिः प्रयस्वान्प्रयसे हितः. इन्दुरत्यो विचक्षणः.. (२३)
मनुष्यों द्वारा बार-बार निचोड़े जाते हुए अन्न के स्वामी, यजमान के लिए हितैषी एवं
सबके द्रष्टा सोम देवों के समीप सदा जाते हैं. (२३)
पवमान ऋतं बृहच्छुक्रं ज्योतिरजीजनत्. कृष्णा तमांसि जङ्घनत्.. (२४)
पवमान सोम ने काले अंधकार को समाप्त करते हुए सत्यरूप, व्यापक व दीप्तिशाली
तेज उत्पन्न किया था. (२४)
पवमानस्य जङ्घ्नतो हरेश्चन्द्रा असृक्षत. जीरा अजिरशोचिषः.. (२५)
बार-बार अंधकार का विनाश करते हुए, हरितवर्ण, गतिशील तेज से युक्त एवं शुद्ध होते
हुए सोम को आनंदित करने वाली व तेज बहने वाली धाराएं दशापवित्र में गिरती हैं. (२५)
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