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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1410 of 1855

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Page 1410

दस उंगलियां और सात ऋत्विज् राक्षसों को मारने में आयुध के समान एवं अतिशय
मादक सोम को मसलते हैं. (८)
सूक्त—१६ देवता—सोम
प्र ते सोतार ओण्यो३ रसं मदाय घृष्वये. सर्गो न तक्त्येतशः.. (१)
हे सोम! तुम्हारा रस निचोड़ने वाले तुम्हे द्यावा-पृथिवी के बीच इंद्र को शत्रुनाश करने के
उद्देश्य से निचोड़ते हैं. सोम निर्मित होने वाले घोड़े के समान चलते हैं. (१)
क्रत्वा दक्षस्य रथ्यमपो वसानमन्धसा. गोषामण्वेषु सश्चिम.. (२)
हम रस निचोड़ने वाले बल के नेता, जलों को ढकने वाले, अन्न से युक्त एवं गायों को
दुधारू बनाने वाले सोम को निचोड़ने के कर्म में उंगलियां मिलाते हैं. (२)
अनप्तमप्सु दुष्टरं सोमं पवित्र आ सृज. पुनीहीन्द्राय पातवे.. (३)
हे अध्वर्यु! शत्रुओं द्वारा अप्राप्त, अंतरिक्ष में वर्तमान व अन्यों द्वारा अपराजित सोम को
दशापवित्र पर डालो एवं इंद्र के पीने के लिए शुद्ध करो. (३)
प्र पुनानस्य चेतसा सोमः पवित्रे अर्षति. क्रत्वा सधस्थमासदत्.. (४)
सोम स्तुति द्वारा पवित्र पदार्थों में से एक हैं. सोम दशापवित्र पर जाते हैं. इसके बाद
कर्म बल से द्रोण कलश में पहुंचते हैं. (४)
प्र त्वा नमोभिरिन्दव इन्द्र सोमा असृक्षत. महे भराय कारिणः.. (५)
हे इंद्र! शक्ति उत्पन्न करने वाले सोम नमस्कार वाले स्तोत्रों के साथ महान् संग्राम के
निमित्त तुम्हारे पास जाते हैं. (५)
पुनानो रूपे अव्यये विश्वा अर्षन्नभि श्रियः. शूरो न गोषु तिष्ठति.. (६)
भेड़ के बालों से बने वस्त्र अर्थात् दशापवित्र के द्वारा छाने गए एवं सभी शोभाओं को
धारण करते हुए सोम गायों के कारण होने वाले संग्राम में स्थिर वीर के समान पात्र में वर्तमान
हैं. (६)
दिवो न सानु पिप्युषी धारा सुतस्य वेधसः. वृथा पवित्रे अर्षति.. (७)
जिस प्रकार अंतरिक्ष से जल नीचे बरसता है, उसी प्रकार शक्तिदाता सोम की तृप्त
करने वाली धाराएं दशापवित्र पर जाती हैं. (७)
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