ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1407 of 1855
Read in contextआ पवमान धारय रयिं सहस्रवर्चसम्. अस्मे इन्दो स्वाभुवम्.. (९)
हे पवमान सोम! तुम हमें बहुत दीप्तियों वाले एवं सुंदर भवनों से युक्त घर दो. (९)
सूक्त—१३ देवता—सोम
सोमः पुनानो अर्षति सहस्रधारो अत्यविः. वायोरिन्द्रस्य निष्कृतम्.. (१)
पवित्र करने वाले एवं हजारों धारा वाले सोम मेष के बालों के बने दशापवित्र को पार
करके वायु और इंद्र के पीने हेतु पात्र में जाते हैं. (१)
पवमानमवस्यवो विप्रमभि प्र गायत. सुष्वाणं देववीतये.. (२)
हे रक्षा चाहने वाले उद्गाताओ! शोधक देवों को प्रसन्न करने वाले एवं देवों के पीने के
निमित्त निचुड़े हुए सोम को लक्ष्य करके गाओ. (२)
पवन्ते वाजसातये सोमाः सहस्रपाजसः. गृणाना देववीतये.. (३)
अत्यंत शक्तिदाता एवं स्तुति वाले सोम अन्नप्राप्ति एवं यज्ञपूर्ति के लिए टपकते हैं. (३)
उत नो वाजसातये पवस्व बृहतीरिषः. द्युमदिन्दो सुवीर्यम्.. (४)
हे सोम! हमें अन्न देने के लिए दीप्तियुक्त एवं शक्ति वाली धाराएं गिराओ. (४)
ते नः सहस्रिणं रयिं पवन्तामा सुवीर्यम्. सुवाना देवास इन्दवः.. (५)
निचुड़ते हुए सोमदेव! हमें हजारों धन एवं शोभन शक्ति दें. (५)
अत्या हियाना न हेतृभिरसृग्रं वाजसातये. वि वारमव्यमाशवः.. (६)
शीघ्रगामी सोम प्रेरकों द्वारा प्रेरित होकर इस प्रकार मेष के बालों के बने दशापवित्र को
पार करते हैं, जिस प्रकार युद्ध के प्रति प्रेरित घोड़े दौड़ते हैं. (६)
वाश्रा अर्षन्तीन्दवोऽभि वत्सं न धेनवः. दधन्विरे गभस्त्योः.. (७)
जैसे रंभाती हुई गाएं बछड़ों की ओर जाती हैं, इसी प्रकार शब्द करते हुए सोम पात्र की
ओर जाते हैं. ऋत्विज् हाथों में सोम को धारण करते हैं. (७)
जुष्ट इन्द्राय मत्सरः पवमान कनिक्रदत्. विश्वा अप द्विषो जहि.. (८)
हे इंद्र के लिए प्रिय एवं मद करने वाले सोम! तुम शब्द करते हुए हमारे सभी शत्रुओं को
मारो. (८)
ebook converter DEMO Watermarks*