ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1406 of 1855
Read in context(९)
सूक्त—१२ देवता—पवमान सोम
सोमा असृग्रमिन्दवः सुता ऋतस्य सादने. इन्द्राय मधुमत्तमाः.. (१)
निचुड़े हुए एवं अतिशय मधुर सोम यज्ञशाला में इंद्र के लिए निर्मित किए जाते हैं. (१)
अभि विप्रा अनूषत गावो वत्सं न मातरः. इन्द्रं सोमस्य पीतये.. (२)
गाएं जिस प्रकार दूध पीने के लिए बछड़ों को बुलाती हैं, उसी प्रकार मेधावी यजमान
सोम पीने के लिए इंद्र को बुलाते हैं. (२)
मदच्युत्क्षेति सादने सिन्धोरूर्मा विपश्चित्. सोमो गौरी अधि श्रितः.. (३)
नशीला रस टपकाने वाले तथा विद्वान् सोम नदी की तरंगों एवं मध्यमा वाणी में स्थान
पाते हैं. (३)
दिवो नाभा विचक्षणोऽव्यो वारे महीयते. सोमो यः सुक्रतुः कविः.. (४)
शोभन-बुद्धि वाले, कवि एवं विशेष द्रष्टा सोम अंतरिक्ष की नाभि के समान मेष के बालों
पर पूजित होते हैं. (४)
यः सोमः कलशेष्वाँ अन्तः पवित्र आहितः. तमिन्दुः परि षस्वजे.. (५)
कलशों एवं दशापवित्र नामक पात्र में रखे सोमरस की किरणों में सोमदेव प्रवेश करते
हैं. (५)
प्र वाचमिन्दुरिष्यति समुद्रस्याधि विष्टपि. जिन्वन् कोशं मधुश्रुतम्.. (६)
सोम जल बरसाने वाले मेघ को प्रसन्न करते हुए अंतरिक्ष के दृढ़ स्थल में शब्द करते हैं.
(६)
नित्यस्तोत्रो वनस्पतिर्धीनामन्तः सबर्दुघः. हिन्वानो मानुषा युगा.. (७)
नित्य स्तुति किए जाते हुए एवं अमृत दुहने वाले सोम नामक वनस्पति मनुष्यों के एक-
एक दिन को प्रसन्न करते हुए यज्ञों में निवास करते हैं. (७)
अभि प्रिया दिवस्पदा सोमो हिन्वानो अर्षति. विप्रस्य धारया कविः.. (८)
कवि सोम अंतरिक्ष से प्रेरित होकर मेधावियों द्वारा निर्मित धारा के रूप में अपने प्रिय
स्थान को प्राप्त करते हैं. (८)
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