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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1396 of 1855

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Page 1396

है, जैसे युद्ध के लिए घोड़े को सजाया जाता है. (३)
एष विश्वानि वार्या शूरो यन्निव सत्वभिः. पवमानः सिषासति.. (४)
ये शूर सोम अपनी शक्तियों द्वारा सभी संपत्तियों को लाकर हमें बांटना चाहते हैं. (४)
एष देवो रथर्यति पवमानो दशस्यति. आविष्कृणोति वग्वनुम्.. (५)
टपकते हुए सोमदेव हमारे यज्ञ में आने के लिए रथ चाहते हैं, हमारी अभिलाषाएं पूरी
करते हैं एवं शब्द प्रकट करते हैं. (५)
एष विप्रैरभिष्टुतोऽपो देवो वि गाहते. दधद्रत्नानि दाशुषे.. (६)
स्तोताओं द्वारा स्तुत ये सोमदेव हव्यदाता यजमान को रत्न देते हुए जलों में प्रवेश करते
हैं. (६)
एष दिवं वि धावति तिरो रजांसि धारया. पवमानः कनिक्रदत्.. (७)
ये टपकने वाले सोम शब्द करते हुए सारे संसार को तिरस्कृत करते हुए स्वर्ग को जाते
हैं. (७)
एष दिवं व्यासर्त्तरो रजांस्यस्पृतः. पवमानः स्वध्वरः.. (८)
शोभन यज्ञ वाले एवं अपराजित पवमान सोम सभी लोकों को तिरस्कृत करते हुए स्वर्ग
को जाते हैं. (८)
एष प्रत्नेन जन्मना देवो देवेभ्यः सुतः. हरिः पवित्रे अर्षति.. (९)
हरे रंग वाले एवं दीप्तिशाली सोम पुराने जन्मों से ही देवों के लिए निचुड़ कर दशापवित्र
में रहने के लिए जाते हैं. (९)
एष उ स्य पुरुव्रतो जज्ञानो जनयन्निषः. धारया पवते सुतः.. (१०)
ये अनेक कर्मों वाले सोम उत्पन्न होते ही अन्नों को जन्म देते हुए निचुड़कर धारारूप में
गिरते हैं. (१०)
सूक्त—४ देवता—पवमान सोम
सना च सोम जेषि च पवमान महि श्रवः. अथा नो वस्यसस्कृधि.. (१)
हे महान्, अन्न एवं पवमान सोम! हमारे यज्ञ में देवों की सेवा करो, शत्रुओं को जीतो एवं
हमें श्रेय प्रदान करो. (१)
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