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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1375 of 1855

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Page 1375

हे इंद्र! जो विश्वेदेव तुम्हारे मित्र थे, उन्होंने वृत्र असुर की सांस से भयभीत होकर तुम्हें
छोड़ दिया था. उस समय मरुतों के साथ तुम्हारी मित्रता स्थापित हुई उसके बाद तुमने सभी
शत्रुसेनाओं को जीत लिया. (७)
त्रिः षष्टिस्त्वा मरुतो वावृधाना उस्रा इव राशयो यज्ञियासः.
उप त्वेमः कृधि नो भागधेयं शुष्मं त एना हविषा विधेम.. (८)
हे इंद्र! तिरसठ यज्ञयोग्य मरुतों ने गायों के समान झुंड बनाकर तुम्हें बढ़ाया था. हम
तुम्हारे समीप आते हैं. तुम हमें उपभोग के योग्य अन्न दो. हम अपने हव्य द्वारा तुम्हारा बल
बढ़ावेंगे. (८)
तिग्ममायुधं मरुतामनीकं कस्त इन्द्र प्रति वज्रं दधर्ष.
अनायुधासो असुरा अदेवाश्चक्रेण ताँ अप वप ऋजीषिन्.. (९)
हे इंद्र! तुम्हारा आयुध तेज है और मरुतों की सेना तुम्हारे साथ है. कौन तुम्हारे वज्र के
प्रतिकूल आचरण कर सकता है? हे सोम पीने वाले इंद्र! तुम अपने चक्र द्वारा आयुधहीन एवं
देवद्वेषी असुरों को दूर भगाओ. (९)
मह उग्राय तवसे सुवृक्तिं प्रेरय शिवतमाय पश्वः.
गिर्वाहसे गिर इन्द्राय पूर्वीर्धेहि तन्वे कुविदङ्ग वेदत् .. (१०)
हे स्तोता! मुझे पशु प्रदान करने के लिए महान्, शक्तिशाली, उन्नत एवं परम
कल्याणकारी इंद्र की शोभन स्तुति करो. स्तुति के योग्य इंद्र के लिए तुम बहुत सी स्तुतियां
करो. इंद्र हमारे पुत्रों के लिए बहुत धन दें. (१०)
उक्थवाहसे विभ्वे मनीषा दृणा न पारमीरया नदीनाम्.
नि स्पृश धिया तन्वि श्रुतस्य जुष्टतरस्य कुविदङ्ग वेदत्.. (११)
हे स्तोता! जिस प्रकार नाविक नाव द्वारा यात्रियों को पार पहुंचाता है, उसी प्रकार तुम
मंत्रों द्वारा प्राप्त होने योग्य एवं महान् इंद्र के पास स्तुतियां भेजो. अपनी स्तुति द्वारा प्रसिद्ध
एवं अतिशय प्रसन्नतादायक इंद्र को हमारे पास पहुंचाओ. इंद्र हमारी संतान के लिए बहुत धन
दें. (११)
तद्विविद्धि यत्त इन्द्रो जुजोषत्स्तुहि सुष्टुतिं नमसा विवास.
उप भूष जरितर्मा रुवण्यः रावया वाचं कुविदङ्ग वेदत्.. (१२)
हे ऋत्विज्! इंद्र जो चाहते हैं, तुम वही करो. हे स्तोता! शोभन स्तुति करने वाले इंद्र की
स्तुति करो एवं नमस्कार द्वारा उनकी सेवा करो. तुम अपने को अलंकृत करो. रोओ मत. इंद्र
को अपना स्तुतिवचन सुनाओ. इंद्र तुम्हें बहुत धन दें. (१२)
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