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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1324 of 1855

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Page 1324

आदित्यों का विचित्र एवं स्तुतियोग्य धन हव्य देने वाले एवं पर्याप्त यज्ञ करने वाले
यजमान के लिए है. (३)
महि वो महतामवो वरुण मित्रार्यमन्. अवांस्या वृणीमहे.. (४)
हे वरुण, मित्र एवं अर्यमा! तुम महान् हो एवं यजमान के प्रति तुम्हारी रक्षा महान् है.
हम तुम्हारी रक्षा की प्रार्थना करते हैं. (४)
जीवान्नो अभि धेतनादित्यासः पुरा हथात्. कद्ध स्थ हवनश्रुतः.. (५)
हे आदित्यो! हम जीवितों के पास दौड़कर आओ. हे पुकार सुनने वाले आदित्यो!
हमारी मृत्यु से पहले आना. (५)
यद्वः श्रान्ताय सुन्वते वरूथमस्ति यच्छर्दिः. तेना नो अधि वोचत.. (६)
हे आदित्यो! सोमरस निचोड़ने के काम से थके हुए यजमान के लिए तुम्हारे पास जो
उत्तम धन एवं घर है, उससे हमें प्रसन्न करके हमसे अच्छी-अच्छी बातें करो. (६)
अस्ति देवा अंहोरुर्वस्ति रत्नमनागसः. आदित्या अद्भुतैनसः.. (७)
हे देवो! पापी के पास महान् पाप है एवं पापहीन के पास उत्तम पुण्य है. हे पापरहित
आदित्यो! हमारी अभिलाषा पूरी करो. (७)
मा नः सेतुः सिषेद्यं महे वृणक्तु नस्परि. इन्द्र इद्धि श्रुतो वशी.. (८)
जाल हम लोगों को न बांधे. जाल हमें महान् यज्ञकर्म के लिए छोड़ दे. इंद्र प्रसिद्ध एवं
सबको वश में करने वाले हैं. (८)
मा नो मृचा रिपूणां वृजिनानामविष्यवः. देवा अभि प्र मृक्षत.. (९)
हे रक्षा के इच्छुक देवो! हमें छुड़ाओ. हमें हिंसा करने वाले शत्रुओं के जाल में मत
बांधना. (९)
उत त्वामदिते मह्यहं देव्युप ब्रुवे. सुमृळीकामभिष्टये.. (१०)
हे महान् एवं सुख देने वाली अदिति देवी! मनचाहा फल पाने के लिए मैं तुम्हारी स्तुति
करता हूं. (१०)
पर्षि दीने गभीर आँ उग्रपुत्रे जिघांसतः. माकिस्तोकस्य नो रिषत्.. (११)
हे अदिति! हमारा सब ओर से पालन करो. उथले एवं पुत्रों को दुःखी करने वाले जल में
हिंसक का जाल हमारे पुत्र को न मारे. (११)
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