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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1272 of 1855

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Page 1272

पर गिरो. भैंसा जिस प्रकार जल की ओर आता है, उसी प्रकार तुम सोमरस की ओर आओ.
तुम उषा एवं सूर्य के साथ मिलकर तीनों सवनों में आओ. (७)
हंसाविव पतथो अध्वगाविव सोमं सुतं महिषेवाव गच्छथ:.
सजोषसा उषसा सूर्येण च त्रिवर्तिर्यातमश्विना.. (८)
हे अश्विनीकुमारो! हंस एवं पथिक जिस प्रकार जल पर गिरते हैं, उसी प्रकार तुम
सोमरस पर गिरो. भैंसा जिस प्रकार जल की ओर आता है, उसी प्रकार तुम सोम की ओर
आओ. तुम उषा एवं सूर्य के साथ मिलकर तीनों सवनों में आओ. (८)
श्येनाविव पतथो हव्यदातये सोमं सुतं महिषेवाव गच्छथ:.
सजोषसा उषसा सूर्येण च त्रिवर्तिर्यातमश्विना.. (९)
हे अश्विनीकुमारो! तुम यजमान के निचोड़े हुए सोमरस की ओर बाज के समान तेजी से
आओ. जिस प्रकार भैंसा पानी की ओर आता है, उसी प्रकार तुम सोम की ओर आओ. तुम
उषा एवं सूर्य के साथ मिलकर तीनों सवनों में आओ. (९)
पिबतं च तृप्णुतं चा च गच्छतं प्रजां च धत्तं द्रविणं च धत्तम्.
सजोषसा उषसा सूर्येण चोर्जं नो धत्तमश्विना.. (१०)
हे अश्विनीकुमारो! सोमरस पिओ, तृप्त बनो, आओ व हमें संतान एवं धन दो. तुम सूर्य
एवं उषा के साथ मिलकर हमें बल दो. (१०)
जयतं च प्र स्तुतं च प्र चावतं प्रजां च धत्तं द्रविणं च धत्तम्.
सजोषसा उषसा सूर्येण चोर्जं नो धत्तमश्विना.. (११)
हे अश्विनीकुमारो! तुम शत्रुओं को जीतो, स्तोताओं की प्रशंसा एवं रक्षा करो तथा हमें
संतान व धन दो. तुम उषा व सूर्य के साथ मिलकर हमें बल दो. (११)
हतं च शत्रून्यततं च मित्रिण: प्रजां च धत्तं द्रविणं च धत्तम्.
सजोषसा उषसा सूर्येण चोर्जं नो धत्तमश्विना.. (१२)
हे अश्विनीकुमारो! तुम शत्रुओं को मारो एवं मित्रों के साथ चलो. हमें संतान व धन दो.
तुम उषा व सूर्य के साथ मिलकर हमें बल दो. (१२)
मित्रावरुणवन्ता उत धर्मवन्ता मरुत्वन्ता जरितुर्गच्छथो हवम्.
सजोषसा उषसा सूर्येण चादित्यैर्यातमश्विना.. (१३)
हे अश्विनीकुमारो! तुम मित्र, वरुण, धर्म व मरुतों के साथ स्तोता की पुकार सुनने
आओ. तुम उषा, सूर्य एवं आदित्यों के साथ आओ. (१३)
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