ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1271 of 1855
Read in contextअग्निनेन्द्रेण वरुणेन विष्णुनादित्यै रुद्रैर्वसुभिः सचाभुवा.
सजोषसा उषसा सूर्येण च सोमं पिबतमश्विना.. (१)
हे अश्विनीकुमारो! तुम अग्नि, इंद्र, वरुण, विष्णु, आदित्यों, रुद्रों, वसुओं उषा तथा सूर्य
के साथ मिलकर सोमरस पिओ. (१)
विश्वाभिर्धीभिर्भुवनेन वाजिना दिवा पृथिव्याद्रिभिः सचाभुवा.
सजोषसा उषसा सूर्येण च सोमं पिबतमश्विना.. (२)
हे शक्तिशाली अश्विनीकुमारो! तुम समस्त बुद्धियों, सब प्राणियों, द्युलोक, पृथ्वी, पर्वतों,
उषा तथा सूर्य के साथ मिलकर सोमरस पिओ. (२)
विश्वैर्देवैस्त्रिभिरेकादशैरहाद्भिर्मरुद्भिर्भृगुभिः सचाभुवा.
सजोषसा उषसा सूर्येण च सोमं पिबतमश्विना.. (३)
हे अश्विनीकुमारो! तुम इस यज्ञ में हव्य भक्षण करने वाले तैंतीस देवों, मरुतों, भृगुओं,
उषा एवं सूर्य के साथ सोमरस पिओ. (३)
जुषेथां यज्ञं बोधतं हवस्य मे विश्वेह देवौ सवनाव गच्छतम्.
सजोषसा उषसा सूर्येण चेषं नो वोळहमश्विना.. (४)
हे अश्विनीकुमारो! तुम इस यज्ञ का सेवन करो एवं मेरी पुकार सुनो. तुम इस यज्ञ के
तीनों सवनों में आओ एवं उषा व सूर्य के साथ मिलकर अन्न स्वीकार करो. (४)
स्तोमं जुषेथां युवशेव कन्यानां विश्वेह देवौ सवनाव गच्छतम्.
सजोषसा उषसा सूर्येण चेषं नो वोळहमश्विना.. (५)
हे देव अश्विनीकुमारो! जिस प्रकार युवक कन्याओं की पुकार पर ध्यान देते हैं, उसी
प्रकार तुम हमारे यज्ञ में स्तोत्रों को स्वीकार करो. तुम इस यज्ञ के तीनों सवनों में आओ एवं
उषा व सूर्य के साथ मिलकर हमारा अन्न स्वीकार करो. (५)
गिरो जुषेथामध्वरं जुषेथां विश्वेह देवौ सवनाव गच्छतम्.
सजोषसा उषसा सूर्येण चेषं नो वोळहमश्विना.. (६)
हे देव अश्विनीकुमारो! तुम हमारी स्तुति सुनो, यज्ञ को स्वीकार करो, इस यज्ञ के तीनों
सवनों में आओ एवं उषा व सूर्य के साथ मिलकर हमारा अन्न ग्रहण करो. (६)
हारिद्रवेव पतथो वनेदुप सोमं सुतं महिषेवाव गच्छथः.
सजोषसा उषसा सूर्येण च त्रिवर्तिर्यातमश्विना.. (७)
हे अश्विनीकुमारो! हारिद्रव पक्षी जिस प्रकार जल पर गिरते हैं, उसी प्रकार तुम सोमरस
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