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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1261 of 1855

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Page 1261

यजमान देवों की मनपसंद पूजा करना चाहता है, वह यज्ञ न करने वाले को हरा देता है.
(१६)
नकिष्टं कर्मणा नशन्न प्र योषन्न योषति.
देवानां य इन्मनो यजमान इयक्षत्यभीदयज्वनो भुवत्.. (१७)
जो यजमान देवों का मनचाहा यज्ञ करना चाहता है उसे अपने कर्म द्वारा कोई वश में
नहीं कर सकता, उसे कोई स्थान से हटा नहीं सकता तथा वह पुत्रादि द्वारा रहित नहीं होता.
देवों की मनचाही पूजा का अभिलाषी यज्ञ न करने वाले को हराता है. (१७)
असदत्र सुवीर्यमुत त्यदाश्वश्व्यम्.
देवानां य इन्मनो यजमान इयक्षत्यभीदयज्वनो भुवत्.. (१८)
देवों का मनचाहा यज्ञ करने का इच्छुक यजमान शोभन वीर्यवाला पुत्र पाता है एवं
अश्वयुक्त धन प्राप्त करता है. जो यजमान देवों की मनचाही पूजा करता है, वह यज्ञ न करने
वाले को हरा देता है. (१८)
सूक्त—३२ देवता—इंद्र
प्र कृतान्युजीषिणः कण्वा इन्द्रस्य गाथया. मदे सोमस्य वोचत.. (१)
हे कण्वगोत्रीय ऋषियो! जब इंद्र अपनी कहानी सुनकर प्रसन्न हो जावें, तब तुम ऋजीष
वाले सोम का वर्णन करो. (१)
यः सृबिन्दमनर्शानं पिप्रुं दासमहीशुवम्. वधीदुग्रो रिणन्नपः.. (२)
उग्र इंद्र ने जल को बहने के लिए प्रेरित करते हुए सुविन्द, अनर्शानि, पिप्रु, दास और
अहीशुव को मारा था. (२)
न्यर्बुदस्य विष्टपं वर्ष्माणं बृहतस्तिर. कृषे तदिन्द्र पौंस्यम्.. (३)
हे इंद्र! महान् मेघ के जलावरोधक स्थान में छेद करो एवं यह वीरतापूर्ण कार्य पूरा करो.
(३)
प्रति श्रुताय वो धृष्ण्तूर्णाशं न गिरेरधि. हुवे सुशिप्रमूतये.. (४)
हे स्तोताओ! मैं तुम्हारी प्रार्थनाएं सुनने के लिए शत्रुओं का नाश करने वाले एवं शोभन
हनु वाले इंद्र को उसी प्रकार बुलाता हूं, जिस प्रकार बादल से पानी की प्रार्थना की जाती है.
(४)
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