Skip to content
SarvaKosh
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1241 of 1855

Read in context
Page 1241

हे वीर एवं प्रजापालक अग्नि! हमारी नवीन स्तुतियों को सुनो एवं अपने ताप वाले तेज
से मायावी राक्षसों को जलाओ. (१४)
न तस्य मायया चन रिपुरीशीत मर्त्य:. यो अग्नये ददाश हव्यदातिभि:.. (१५)
शत्रु लोग माया द्वारा भी उसे वश में नहीं कर सकते, जो हव्यदाता ऋत्विजों द्वारा अग्नि
को हवि देता है. (१५)
व्यश्वस्त्वा वसुविद्मुक्षण्युप्रीणादृषि:. महो राये तमु त्वा समिधीमहि.. (१६)
स्वयं को धन की वर्षा करने वाला बनाने की इच्छा से व्यश्व ऋषि ने धन देने वाले तुझ
अग्नि को प्रसन्न किया था. हम महान् धन पाने के लिए उसी अग्नि को जलाते हैं. (१६)
उशना काव्यस्त्वा नि होतारमसादयत्. आयजिं त्वा मनवे जातवेदसम्.. (१७)
हे अग्नि! कविपुत्र उशना नामक ऋषि ने राजा मनु के कल्याण के लिए तेरे सामने यज्ञ
करने वाले एवं जातवेद अग्नि को स्थापित किया था. (१७)
विश्वे हि त्वा सजोषसो देवासो दूतमक्रत. श्रुष्टी देव प्रथमो यज्ञियो भुव:.. (१८)
हे अग्नि! सभी देवों ने मिलकर तुम्हें अपना दूत बनाया था. हे देवों में प्रमुख अग्नि! तुम
शीघ्र ही यज्ञ के योग्य बन गए थे. (१८)
इमं घा वीरो अमृतं दूतं कृण्वीत मर्त्य:. पावकं कृष्णवर्तनिं विहायसम्.. (१९)
वीर मनुष्य ने इन मरणरहित, पवित्र करने वाले, काले मार्ग वाले एवं महान् अग्नि को
अपना दूत बनाया था. (१९)
तं हुवेम यतस्रुच: सुभासं शुक्रशोचिषम्. विशामग्निमजरं प्रत्नमीड्यम्.. (२०)
हाथ में स्रुच ग्रहण करने वाले हम शोभन दीप्ति वाले, शुभ्र तेजयुक्त, मनुष्यों द्वारा स्तुति
योग्य एवं जरारहित अग्नि को बुलाते हैं. (२०)
यो अस्मै हव्यदातिभिराहुतिं मर्तोऽविधत्. भूरि पोषं स धत्ते वीरवद्यश:.. (२१)
जो मनुष्य हव्यदाता ऋत्विजों द्वारा इस अग्नि को आहुति देता है, वह अधिक पुष्ट करने
वाला तथा वीर संतान से युक्त धन प्राप्त करता है. (२१)
प्रथमं जातवेदसमग्निं यज्ञेषु पूर्व्यम्. प्रति स्रुगेति नमसा हविष्मती.. (२२)
हव्य से युक्त स्रुच देवों में प्रधान, जातवेद एवं प्राचीन अग्नि के समीप नमस्कार के हेतु
साथ जाता है. (२२)
ebook converter DEMO Watermarks*