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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1126 of 1855

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Page 1126

दीप्तिशालिनी उषा को वहन करने वाले, तेजस्वी एवं रंगबिरंगे घोड़े दिखाई दे रहे हैं.
उज्ज्वल वर्ण वाली उषा अनेक रूपवाले रथ द्वारा सब जगह जाती है एवं अपने भक्त को
रत्न देती है. (६)
सत्या सत्येभिर्महती महद्भिर्देवी देवेभिर्यजता यजत्रैः.
रुजद् दृळहानि दददुस्रियाणां प्रति गाव उषसं वावशन्त.. (७)
सच्ची, महती एवं यज्ञपात्र उषादेवी अन्य सच्चे, महान् एवं यज्ञपात्र देवों के साथ
मिलकर दृढ़तर अंधकार का नाश करती है एवं गायों के घूमने हेतु प्रकाश देती है. गाएं
उषाओं की कामना करती हैं. (७)
नू नो गोमद्वीरवद्वेहि रत्नमुषो अश्वावत्पुरुभोजो अस्मे.
मा नो बर्हिः पुरुषता निदे कर्यूं पातं स्वस्तिभिः सदा नः.. (८)
हे उषा! हमें गायों, वीरों एवं अश्वों से युक्त धन दो. तुम हमें बहुत सा अन्न दो. तुम पुरुषों
के बीच हमारे यज्ञ की निंदा मत करना. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा
करो. (८)
सूक्त—७६ देवता—उषा
उद् ज्योतिरमृतं विश्वजन्यं विश्वानरः सविता देवो अश्रेत्.
क्रत्वा देवानाम्जनिष्ट चक्षुराविरकभुवनं विश्वमुषाः.. (१)
सबके नेता सविता देव विनाशरहित एवं सर्वजन-हितकारी ज्योति का आश्रय लेकर
ऊंचे उठते हैं. वे देवकर्मों अर्थात् यज्ञों के हेतु उत्पन्न हुए हैं. उषा ने सभी देवों का नेत्र बनकर
सारे लोक को आविष्कृत किया है. (१)
प्र मे पन्था देवयाना अदृश्रन्नमर्धन्तो वसुभिरिष्कृतासः.
अभूदु केतुरुषसः पुरस्तात्प्रतीच्यागादधि हर्म्येभ्यः.. (२)
मैंने हिंसा न करने वाले एवं तेजों द्वारा परिष्कृत देवयान मार्ग देखे हैं. उषा का ज्ञान
कराने वाला प्रकाश पूर्व दिशा में था. वह उषा हमारे सामने ऊंचे स्थानों से आती है. (२)
तानीदहानि बहुलान्यासन्‍या प्राचीनमुदिता सूर्यस्य.
यतः परि जारइवाचरन्त्युषो ददृक्षे न पुनर्यतीव.. (३)
हे उषा! तुम्हारा जो तेज सूर्य से पहले उदित होता है एवं जिस तेज के सामने तुम अपने
पति सूर्य के समीप साध्वी नारी के समान दिखाई देती हो, तुम्हारा वह तेज अधिक मात्रा में
है. (३)
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