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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1125 of 1855

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Page 1125

शोभनघर में आश्रय पाते हैं. (६)
सूक्त—७५ देवता—उषा
व्यु१षा आवो दिविजा ऋतेनाऽऽविष्कृण्वाना महिमानमागात्.
अप द्रुहस्तम आवरजुष्टमङ्गिरस्तमा पथ्या अजीगः.. (१)
उषा ने अंतरिक्ष में उत्पन्न होकर प्रकाश फैलाया एवं वह अपने तेज से अपनी महिमा
प्रकट करती हुई आई. उषा ने सबके अप्रिय शत्रुरूपी अंधकार को दूर भगाया एवं प्राणियों के
व्यवहार के लिए अतिशय गंतव्य मार्गों को प्रकट किया. (१)
महे नो अद्य सुविताय बोध्युषो महे सौभागाय प्र यन्धि.
चित्रं रयिं यशसं धेह्यस्मे देवि मर्तेषु मानुषि श्रवस्युम्.. (२)
हे उषा! आज हमारी महान् सुखप्राप्ति के लिए जागो एवं हमें महान् सौभाग्य दो. हे
मानवहितकारिणी उषादेवी! हमें यशयुक्त विचित्र धन दो एवं हम मानवों को अन्न वाला पुत्र
दो. (२)
एते त्ये भानवो दर्शतायाश्चित्रा उषसो अमृतास आगुः.
जनयन्तो दैव्यानि व्रतान्यापृणन्तो अन्तरिक्षा व्यस्थुः.. (३)
दर्शनीय उषा की ये विशाल, आश्चर्यजनक एवं विनाशरहित किरणें देवसंबंधी यज्ञों का
आरंभ करती हुई एवं अंतरिक्ष को व्याप्त करती हुई आती हैं एवं फैलती हैं. (३)
एषा स्या युजाना पराकात्पञ्च क्षितीः परि सद्यो जिगाति.
अभिपश्यन्ती वयुना जनानां दिवो दुहिता भुवनस्य पत्नी.. (४)
स्वर्ग की पुत्री एवं भुवनों का पालन करने वाली उषा प्राणियों की पहचान करती है एवं
दूर देश में स्थित होकर भी उद्योग करती हुई पांच वर्णों के पास जाती है. (४)
वाजिनीवती सूर्यस्य योषा चित्रामघा राय ईशे वसूनाम्.
ऋषिष्टुता जरयन्ती मघोन्युषा उच्छति वह्निभिर्गृणाना.. (५)
अन्न की स्वामिनी सूर्य की पत्नी एवं विचित्र धन से युक्त उषा सभी धनों की
अधिकारिणी है. ऋषियों द्वारा स्तुत, बुढ़ापे तक लंबी उम्र देने वाली एवं धनयुक्ता उषा
यजमान की स्तुतियां सुनकर प्रकाश करती है. (५)
प्रति द्युतानामरुषासो अश्वाश्चित्रा अदृश्रन्नुषसं वहन्तः.
याति शुभ्रा विश्वपिशा रथेन दधाति रत्नं विधते जनाय.. (६)
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