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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1105 of 1855

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हमारे हवि का सेवन करो. (९)
गृहमेधास आ गत मरुतो माप भूतन. युष्माकोती सुदानव:.. (१०)
हे शोभनदान वाले मरुतो! तुम्हारा यज्ञ घर में किया जाता है. तुम अपनी रक्षाओं सहित
आओ, जाओ मत. (१०)
इहेह व: स्वतवस: कवय: सूर्यत्वच:. यज्ञं मरुत आ वृणे.. (११)
हे स्वयं बढ़े हुए, क्रांतदर्शी एवं सूर्य के रंग वाले मरुतो! मैं यज्ञ की कल्पना करता हूं.
(११)
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्.
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्.. (१२)
हम सुगंधि वाले एवं पुष्टि बढ़ाने वाले त्र्यंबक का यज्ञ करते हैं. हे रुद्र देव! जैसे डंठल से
बेर टूटता है, उसी प्रकार हमें मृत्युबंधन से मुक्त करो, अमृत से नहीं. (१२)
सूक्त—६० देवता—सूर्य आदि
यदद्य सूर्य ब्रवोऽनागा उद्यन्मित्राय वरुणाय सत्यम्.
वयं देवत्रादिते स्याम तव प्रियासो अर्यमन् गृणन्त:.. (१)
हे सूर्य देव! आज उदय होते हुए तुम यदि हमें सब देवों के मध्य पापरहित कहो तो हे
दीनतारहित सूर्य! हम मित्र व वरुण के लिए वास्तव में निष्पाप हो जाएंगे. हे अर्यमा! हम
तुम्हारी स्तुति करते हुए सबके प्रिय हों. (१)
एष स्य मित्रावरुणा नृचक्षा उभे उदेति सूर्यो अभि जमन्.
विश्वस्य स्थातुर्जगतश्च गोपा ऋजु मर्तेषु वृजिना च पश्यन्.. (२)
हे मित्र व वरुण! ये ही मानवों के देखने वाले सूर्य द्यावा-पृथिवी की ओर उदित होते हैं.
सूर्य सब स्थावर एवं गतिशील प्राणियों के पालनकर्त्ता हैं तथा मानवों में पाप और पुण्य देखते
हैं. (२)
अयुक्त सप्त हरित: सधस्थाद्या ईं वहन्ति सूर्यं घृताची:.
धामानि मित्रावरुणा युवाकु: सं यो यूथेव जनिमानि चष्टे.. (३)
हे मित्र व वरुण! सूर्य ने अंतरिक्ष में हरे रंग के सात घोड़ों को अपने रथ में जोता है.
जल प्रदान करने वाले वे घोड़े सूर्य को ढोते हैं. तुम दोनों की अभिलाषा करने वाले सूर्य उदित
होकर लोकों एवं प्राणियों को इस प्रकार देखते हैं, जिस प्रकार ग्वाला गायों के समूह को