ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1098 of 1855
Read in contextधीर व्यक्ति इन सर्वांगश्वेत मरुतों को जानते हैं. पृश्नि ने इन्हें अंतरिक्ष में धारण किया था.
(४)
सा विट् सुवीरा मरुद्भिरस्तु सनात्सहन्ती पुष्यन्ती नृम्णम्.. (५)
वह प्रजा मरुतों के कारण चिरकाल से शत्रुओं को हराती हुई धन को पुष्ट करने वाली
एवं शोभनपुत्रों वाली हो. (५)
यामं येषाः शुभा शोभिष्ठाः श्रिया सम्मिश्रा ओजोभिरुग्राः.. (६)
मरुत् जाने योग्य स्थानों को सबसे अधिक जाते हैं, अलंकारों से बहुत अधिक सुशोभित
हैं, शोभायुक्त एवं ओजों से उग्र हैं. (६)
उग्रं व ओजः स्थिरा शवांस्यधा मरुद्भिर्गणस्तुविष्मान्.. (७)
हे मरुतो! तुम्हारा तेज उग्र और बल स्थित हो. तुम बुद्धि वाले बनो. (७)
शुभ्रो वः शुष्मः क्रुध्मी मनांसि धुनिर्मुनिरिव शर्धस्य धृष्णोः.. (८)
हे मरुतो! तुम्हारा बल सब ओर शोभा वाला एवं तुम्हारे मन क्रोधपूर्ण हैं. शत्रु
पराभवकारी एवं शक्तिशाली मरुद्गण का वेग स्तोता के समान अनेक प्रकार का शब्द करता
है. (८)
सनेम्यस्मद्युयोत दिद्युं मा वो दुर्मतिरिह प्रणङ्नः.. (९)
हे मरुतो! पुराने आयुध हमारे पास से अलग करो. तुम्हारी क्रूरमति हमें व्याप्त न करे.
(९)
प्रिया वो नाम हुवे तुराणामा यत्तृपन्मरुतो वावशानाः.. (१०)
हे शीघ्रता करने वाले मरुतो! तुम्हारे प्यारे नाम हम पुकारते हैं. अभिलाषापूरक
मरुद्गण इससे तृप्त होते हैं. (१०)
स्वायुधास इष्मिणः सुनिष्का उत स्वयं तन्व१ः शुम्भमानाः.. (११)
शोभन आयुधों वाले, गतिशील एवं सुंदर अलंकारों वाले मरुद्गण अपने शरीरों को
सजाते हैं. (११)
शुची वो हव्या मरुतः शुचीनां शुचिं हिनोम्यध्वरं शुचिभ्यः.
ऋतेन सत्यमृतसाप आयञ्छुचिजन्मानः शुचयः पावकाः.. (१२)
हे मरुतो! तुम शुद्धों के लिए शुद्ध हव्य हो. तुम शुद्धों के लिए मैं शुद्ध यज्ञ करता हूं.
ebook converter DEMO Watermarks*