ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1064 of 1855
Read in contextकरो. (५)
सूक्त—३० देवता—इंद्र
आ नो देव शवसा याहि शुष्मिन्भवा वृध इन्द्र रायः अस्य.
महे नृम्णाय नृपते सुवज्र महि क्षत्राय पौंस्याय शूर.. (१)
हे शक्तिशाली इंद्र देव! तुम अपनी शक्ति द्वारा हमारे पास आओ एवं हमारे धन के
बढ़ाने वाले बनो. हे नृपति, शोभनवज्र वाले एवं शूर इंद्र! तुम महान् बली एवं शत्रुनाशक बनो.
(१)
हवन्त उ त्वा हव्यं विवाचि तनूषु शूराः सूर्यस्य सातौ.
त्वं विश्वेषु सेन्यो चनेषु त्वं वृत्राणि रन्धया सुहन्तु.. (२)
हे बुलाने योग्य इंद्र! लोग युद्ध में शरीररक्षा एवं सूर्यप्राप्ति के लिए तुम्हें बुलाते हैं. सब
मनुष्यों में तुम्हीं सेनापति होने योग्य हो. तुम अपने सुहंतु वज्र द्वारा शत्रुओं को हमारे वश में
करो. (२)
अहा यदिन्द्र सुदिना व्युच्छादधो यत्केतुमुपमं समत्सु.
न्य१ग्निः सीददसुरो न होता हुवानो अत्र सुभगाय देवान्.. (३)
हे इंद्र! जब अच्छे दिन आते हैं और तुम स्वयं को युद्ध के समीप वर्तमान समझते हो,
तब देवों के बुलाने वाले एवं बलवान् अग्नि हमें धन देने के लिए देवों को बुलाते हुए यज्ञ में
स्थित होते हैं. (३)
वयं ते त इन्द्र ये च देव स्तवन्त शूर ददतो मघानि.
यच्छा सूरिभ्य उपमं वरूथं स्वाभुवो जरणामश्नवन्त.. (४)
हे शूर इंद्र देव! हम तुम्हारे हैं. जो हव्य देते हुए तुम्हारी स्तुति करते हैं, वे भी तुम्हारे ही
हैं. उन स्तोताओं को उत्तम धन दो. वे सुसमृद्ध होकर बुढ़ापा प्राप्त करें. (४)
वोचेमेदिन्द्रं मघवानमेनं महो रायो राधसो यद्ददन्नः.
यो अर्चतो ब्रह्मकृतिमविष्ठो यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (५)
हम उसी धनस्वामी इंद्र की स्तुतियां करते हैं, जिसने हमें आराधना के योग्य महा धन
दिया है एवं स्तोता के स्तुतिकार्य की रक्षा की है. हे इंद्र! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी रक्षा
करो. (५)
सूक्त—३१ देवता—इंद्र
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