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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

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द्वारा अग्नि की सेवा करेंगे. हम हव्यधारी लोग हव्यों द्वारा उज्ज्वल दीप्ति वाले अग्नि की
सेवा करेंगे. (१)
वयं ते अग्ने समिधा विधेम वयं दाशेम सुष्टुती यजत्र.
वयं घृतेनाध्वरस्य होतर्वयं देव हविषा भद्रशोचे.. (२)
हे अग्नि! हम समिधा द्वारा तुम्हारी सेवा करेंगे. हे यज्ञ के योग्य अग्नि! हम
शोभनस्तुतियों द्वारा तुम्हारी सेवा करेंगे. हे कल्याणकारी ज्वालाओं वाले एवं यज्ञ के होता
अग्नि देव! हम घृत और हव्य द्वारा तुम्हारी सेवा करेंगे. (२)
आ नो देवेभिरुप देवहूतिमग्ने याहि वषट्कृतिं जुषाण:.
तुभ्यं देवाय दाशत: स्याम यूयं पात स्वस्तिभि: सदा न:.. (३)
हे अग्नि! तुम हमारे हव्य का सेवन करो और देवों के साथ हमारे यज्ञ में आओ. हम
अग्नि देव के सेवक बनें. तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (३)
सूक्त—१५ देवता—अग्नि
उपसद्याय मीळ्हुष आस्ये जुहुता हवि:. यो नो नेदिष्ठमाप्यम्.. (१)
हे अध्वर्युगण! समीप बैठने योग्य, अभिलाषापूरक, परम समीप, संबंधी एवं बंधुरूप
अग्नि के मुख में हवि डालो. (१)
य: पञ्च चर्षणीरभि निषसाद दमेदमे. कविर्गृहपतिर्युवा.. (२)
कवि, गृहपालक एवं युवा अग्नि पंचजनों के सामने प्रत्येक घर में स्थित होते हैं. (२)
स नो वेदो अमात्यमग्नी रक्षतु विश्वत:. उतास्मान्पात्वंहस:.. (३)
हमारे मंत्रिरूप अग्नि हमारे धन को समस्त बाधकों से बचावें और पाप से हमारी रक्षा
करें. (३)
नवं नु स्तोममग्नये दिव: श्येनाय जीजनम्. वस्व: कुविद्वनाति न:.. (४)
हम स्वर्ग के बाज पक्षी के समान अग्नि को नया स्तोत्र समर्पित करते हैं. वे हमें बहुत
सा धन दें. (४)
स्पार्हा यस्य श्रियो दृशे रयिर्वीरवतो यथा. अग्रे यज्ञस्य शोचत:.. (५)
यज्ञ के प्रारंभ में प्रज्वलित होने वाले अग्नि की दीप्तियां संतानयुक्त धन के समान
आंखों के लिए अभिलषणीय होती हैं. (५)
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