ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextरथ की रक्षा करने वाले सैनिक शत्रु के स्वादिष्ट अन्न को नष्ट करके अपने योद्धाओं को
अन्न देने वाले एवं विपत्ति में आश्रय लेने योग्य हैं. ये सैनिक शक्तिशाली, गंभीर, विचित्रसेना
वाले, बाणरूपी शक्ति वाले, हिंसित न होने वाले, वीरतापूर्ण, विशाल एवं शत्रुसमूहों को हराने
वाले हैं. (९)
ब्राह्मणासः पितरः सोम्यासः शिवे नो द्यावापृथिवी अनेहसा.
पूषा नः पातु दुरिताद् ऋतावृधो रक्षा माकिर्नो अघशंस ईशत.. (१०)
हे ब्राह्मणो, पितरो और यज्ञ को बढ़ाने वाले सोम तैयार करने वालो! हमारी रक्षा करो.
पापरहित द्यावा-पृथिवी हमारा कल्याण करें. पूषा पाप से हमारी रक्षा करें. शत्रु हमारा स्वामी
न बने. (१०)
सुपर्णं वस्ते मृगो अस्या दन्तो गोभिः संनद्धा पतति प्रसूता.
यत्रा नरः सं च वि च द्रवन्ति तत्रास्मभ्यमिषवः शर्म यंसन्.. (११)
बाण शोभनपंख धारण करता है. हिरण का सींग इसका दांत है. गाय से बनी तांत द्वारा
बंधा हुआ बाण प्रेरणा के अनुसार लक्ष्य पर गिरता है. नेता जहां मिलकर या अलग-अलग
घूमते हैं, वहां ये बाण हमें शरण दें. (११)
ऋजीते परि वृङ्ग्धि नोऽश्मा भवतु नस्तनूः.
सोमो अधि ब्रवीतु नोऽदितिः शर्म यच्छतु.. (१२)
हे बाण! हमें सब प्रकार से बढ़ाओ. हमारा शरीर पत्थर के समान हो. सोम हमारा
पक्षपात करता हुआ बोले. अदिति हमें सुख दें. (१२)
आ जङ्घन्तिसान्वेषां जघनाँ उपजिघ्नते. अश्वाजनि प्रचेतसोऽश्वान्तसमत्सु चोदय..
(१३)
हे कोड़े! उत्तम ज्ञान वाले सारथि तुम्हारे द्वारा घोड़ों को पीठ और जांघों पर चोट करते
हैं. तुम युद्ध में घोड़ों को प्रेरणा दो. (१३)
अहिरिव भोगैः पर्येति बाहुं ज्याया हेतं परिबाधमानः.
हस्तघ्नो विश्वा वयुनानि विद्वान् पुमान्पुमांसं परि पातु विश्वतः.. (१४)
धनुषधारी के हाथ में बंधा हुआ चमड़ा धनुष की डोरी की चोट से हाथ की रक्षा करता
हुआ सांप के समान लिपटा है एवं सब बातों को जानता हुआ पौरुष द्वारा धनुषधारी की रक्षा
करता है. (१४)
आलाक्ता या रुरुशीर्ष्ण्यथो यस्या अयो मुखम्.
इदं पर्जन्यरेतस इष्वै देव्यै बृहन्नमः.. (१५)
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