रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)
Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan
by महाकवि केशवदास
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[ संख्याएँ प्रभावों एवम् छंदों की हैं। 'सू' का तात्पर्य 'सूचना"
में दिए हुए पद्यों से है। ]
अँखियानि मिली ।८।५० आजु मिले ।६।४
अंग-बरन बिबरन ।८।४५ आजु मैं देखी ।३।३८
अंतरिच्छ-गच्छनीनि ।४।११ आजु सखी हरि ।१४।११
अघ ज्यों उदारिहौ ।१४।२६ आतुर ह्वै उठि ।४।१३
अति आदर ।८।५६ आदर मांझ अनादरै ।३।५६
अति बिचित्र बिभ्रम ।३।५३ आदराति तें ।८।५६
अति बिचित्रसुरता ।३।३६ आन नारि के ।६।३ सू.
अति रति-गति ।१।१२ आनन लोचन ।६।१
अति सलज्ज पग ।७।२६ आपने सों ।६।८
अति हित तें ।१०।१४ आपनेहीं भाइ ।१।१६
अदभुत वीर ।१५।८ आपुनहीं तन ।८।१६
अधिक अनूढ़ा ।५।२२ आपुन हूजै ।१२।२४
अधिक बरन ।७।४३ आलंबन उद्दीप ।६।८
अपने अपने-धर्म ।१।६ आलिंगन चुंबन ।३।४१
अपस्मार मति ।६।१४ आलिनि माँझ ।८।३७
अबहीं पुनि ।१२।१७ आवत जानिकै ।६।४३
अबही तौ ।१२।७ आवत देखि लिये ।३।६०
अभिमानी त्यागी ।२।१ आवन कहि आवै।७।१६
अभिलाष सुचित्ता ।८।६ आश्रम चारि ।१।४
अवलोकन आलाप ।६।७ इक तौ उर ।४।७
अवलोकनि अंकुस ।६।१६ इन ठौरनि ।५।२५
अविलोकनि आलाप ।८।८ इहि विधि केसवदास कबि ।१५।१०
आंखिनि जो सूझत ।७।१७ इंहि विधि केसवदास रस ।१६।१४
आंधी सी धाइ ।१३।२० इहि बिधि बरन्यो ।१४।४१
आई है एक ।१४।१६ इहि बिधि मान ।१०।२८
आएँ तें आवैगी ।११।१४ इहि बिधि राधा ।५।३८
आगे कहा करिहौ ।६।१३ इहि बिधि नायक ।७।४१
आज विराजत ।३।५८ इहि बिधि स्याम ।१३।२१
आजु कछू अँखियां ।७।१८ उत्तम मध्यम ।७।३४
आजु देवारि ।१३।१० उपजि परै भय ।१०।१३