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रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan

by महाकवि केशवदास

DevanagariHindipublished286 pages

Page 253 of 286

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Page 253

२५६ रसिकप्रिया
सूचना—यह सवैया लीथोवाली प्रति में नहीं है। हस्तलिखित और
'सरदार' वाली प्रति में है। पर सरदार ने लिखा है कि 'यह कवित्त प्राचीन
पुस्तकन में नाहीं मिलत यातें नारायण कवि याको अर्थ नाहीं लिखो।'
श्रीकृष्णजू को कलहात, यथा—( सवैया )
(४७४) आजु सखी हरि तोसों कछू बड़ी बार लौं बात कही रसभीनी ।
मेलि गरैं पटुका पुनि केसव हारि हियें मनुहारि सी कीनी ।
मोहिं अचंभो महा सु इहा कहि बाँह कहा बड़ो बार लौं लीनी ।
तैं सिर हाथ दियो उनिकैं उनि गाँठि कहा हँसि आँचर दीनी ।११।
शब्दार्थ—बार लौं=देर तक । रसभीनी=रसीली । पटुका=कमर में
बाँधा जानेवाला वस्त्र । मेलि गरैं पटुका=गले में कमर का पटका डालकर ।
हारि=हार मानकर । मनुहारि=प्रार्थना । बड़ी बार लौं=बहुत
देर तक ।
भावार्थ—( सखी की उक्ति नायिका प्रति ) हे सखी, आज श्रीकृष्ण
तुमसे बड़ी देर तक कुछ रसीली बातें करते रहे, गले में पटका डालकर और
हृदय से हार मानकर तेरी मनुहार सी करते रहे। (यहाँ तक तो कोई अचरज
की बात नहीं, पर ) मुझे इस बात का बड़ा अचरज होता है कि उन्होंने
बड़ी देर तक तुम्हारी बाँह (बड़े प्यार से ) ली। तुम भला बतलाओ न
क्या बात है ? तुमने उनके मस्तक पर हाथ क्यों रखा और उन्होंने हँसकर
अंचल के छोर में गाँठ क्यों दी ? (नायिका ने सौत के यहाँ जाने की बात
पर मान किया था, नायक ने अपने गले में पटका डालकर अपनी दीनता
दिखाते हुए उसकी विनती की कि अब ऐसी भूल न होगी, क्षमा करो । उसने
देर तक नायिका की बाँह पकड़कर शपथ ली। नायिका ने सिर पर हाथ
रखकर क्षमा की और उन्होंने यह कहकर अंचल के छोर में गाँठ दी कि अब
गाँठ बाँधता हूँ, कभी ऐसा न करूँगा ) !
सूचना—'सरदार' ने सिर पर हाथ रखने का एक तात्पर्य 'संकेत में
मिलना' भी लिया है ।
अतिहास-लक्षण — ( दोहा )
(४७५) जहाँ हँसहिं निसंक ह्वै, प्रकटहिं सुख मुखबास ।
आधे आधे बरन पद, उपजि परत अतिहास ।१२।
११—बार-बेर । सी-सो । बांह-चाह । बड़ी-बहू । बार लौं-बारन ।
१२—हँसहिं-हँसे । ह्वै-कै । प्रगटहि-प्रकटैं । आधे०-अर्ध बरन पद होत है ।