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रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan

by महाकवि केशवदास

DevanagariHindipublished286 pages

Page 186 of 286

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Page 186

१५० रसिकप्रिया
भावार्थ—( सखी और नायिका के उत्तर प्रत्युत्तर ) (सखी-) प्रिय से
झूठमूठ भी रूठना नहीं चाहिए और इतना अधिक रूठने की तो कल्पना ही नहीं
करनी चाहिए। (नायिका ने) विमुख होने पर भला कौन प्रिय होता है? (सखी)
कल नंदलाल ने मुझसे तेरे लिए कितनी ही लालसाएँ कीं । (नायिका- )
यदि तू बड़ी भोली थी तो कल ही क्यों नहीं झगड़ा निपटाने आई ? सखी-)
अच्छा तो मैं आज ही बीच में पड़ती हूँ । (नायिका-) तब तो तू भेद ही
डालने के लिए बीच में पड़ेगी । श्रीकृष्ण तो कनेर की तरह बाहर और भीतर
से भिन्न स्वरूप वाले हैं ( कनेर की कली ऊपर लाल और भीतर सफेद होती
है, श्रीकृष्ण भी दिखाऊ प्रेम करते हैं भीतर से सौतों को चाहते हैं )।
( सखी-) तू जो बात कहती है, क्या उसका कोई साक्षी है जिससे पूछा जा
सके ? ( नायिका-) जो बात मैंने अपनी आँखों देखी उसके लिए साक्षी
की आवश्यकता ही क्या ?
सूचना—नायिका ने स्वयम् अपनी आँखों से श्रीकृष्ण को अन्य स्त्री की
ओर निहारते देखा है उसी पर लघुमान किया है। सखी (बहिरंग ) तक बात
पहुँच चुकी है इसलिए प्रकाश है ।
अथ प्रिय को लघुमान-लक्षण—(दोहा)
(३५०) प्रिय को कह्यो करै नहीं, प्रिया कौनहूँ काज ।
उपजत है लघुमान तहँ, बरनि कहत कबिराज ।१२।
शब्दार्थ—कौनहूँ काज = किसी कारण से ।
श्रीकृष्णजू को प्रच्छन्न लघुमान, यथा-(सवैया)
(१५१) आगें कहा करिहौ अबहीं तें इतौ दुख दीनो कह्यो बिनु कीनें ।
केसव कौनहु लाज कि लाड़ तें भूलि गई तौ भए हित हीनें ।
भेंटे नहीं भरि अंक लला भरि जीभ न बोली जु बोल नवीनें ।
देखे नहीं कबहूँ भरि आँखिनि आजुहिं कैसें चलै चित लीनें ।१।
शब्दार्थ—कह्यो बिनु कीनें = कहा न करके । कि = अथवा । लाड़ तें =
प्यार से । हीने = अभाव, कमी । चलै चित लीनें = ( चित चलै लीनें ) चित्त
चंचल कर लिया, चित्त हटा लिया ।
भावार्थ—( सखी की उक्ति नायिका से ) आगे क्या करोगी, कहा हुआ
१२—प्रिय-तिय । नहीं-न जहँ । प्रिया-पिया । प्रिया०-प्रिय को
नाहीं लाज । बरनि०-बरनत हैं । १३—करिहो-हरिहो । तें-तौ । कि-के,
की । भए-भई । भेंटे-भेंटत हो । भरि०-भरि जीव, हँसि जोय । आँखिनि-
नैननि । चलै-चलो ।