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रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)

Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)

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DevanagariHindipublished362 pages

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६ अधःपातनयन्त्रवर्णनम्

अथोर्ध्वभाजने लिप्तस्थापितस्य जले सुधीः ।
दीप्तैर्वनोत्पलैः कुर्यादधःपातं प्रयत्नतः ॥ १ ॥

रसरत्न समुच्चयः ।

एक छोटा भाण्ड लेकर उसके भीतरी तलो में पारदकल्क का प्रलेप कर दें तथा पृष्ठ प्रदेश पर माषचूर्णादिक से एक आलवाल ( क्यारी = थाला ) बनाकर सुखालें। फिर एक चौडे उदर वाले भाण्ड में शीतल जल भरकर औषधलिप्त भाण्ड को अधोमुख करके दोनों के मुखों को मिलाकर सन्धिबन्धन कर दें। फिर यन्त्र को एक गढे में रखकर ऊपरी भाण्ड के आलवाल में जङ्गली उपले भर कर अग्नि जला दें। इससे पारद का अधोघट के शीतल जल में अधःपातन होता है।

रसेन्द्रचूडामणि ग्रन्थ में इसका वर्णन निम्नरूप से है ।