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रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)

Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)

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DevanagariHindipublished362 pages

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तृतीयोऽध्यायः। १२९

करेलेको चीर कर उस के बीच में रखदे या करेले के रस में दोलायन्त्रद्वारा स्वेदन करके शुद्धकरना चाहिए ॥ १३१ ॥

अथ सत्त्वग्रहणम्—
तालवद्ग्राहयेत्सत्त्वं शुद्धं शुभ्रं प्रयोजयेत् ॥ १३२ ॥

इसका सत्त्व हरताल के समान निकालना चाहिए यह सत्त्व श्वेतवर्ण का होता है ॥१३२॥

अथ गुणाः—
रसबन्धकरः स्निग्धो दोषघ्नो रसवीर्यकृत् ॥ १३३ ॥
इति गौरीपाषाणाधिकारः ।

संखिया का सत्त्व स्निग्ध, दोषत्रयनाशक होता है तथा पारद का बन्धन करता है और गुण बढांता है ॥ १३३ ॥

अथ नवसारनिरूपणम्—
अथ नवसारोत्पत्तिः—
करीरपीलुकाष्ठेषु पच्यमानेषु चोद्भवः ।
क्षारोऽसौ नवसारः स्याच्चुल्लिकालवणाभिधः ॥ १३४ ॥

करीर और पीलु काष्ठ की लकड़ियों को जलाकर भस्म को पानी में घोलकर छाने हुए पानी को क्षारनिर्माण विधि से जलाने पर जो श्वेत भाग कड़ाही में शेष रह जाता है उसे नौसादर कहते हैं, चुल्लिकालवण भी उसी का नाम है ॥ १३४ ॥

**विमर्शः—**नवसार को नौसादर कहते हैं। इसको सेल अमोनियक, Sal Ammoniac तथा अमोनियम् क्लोराइड Ammonium chloride कहते हैं । इसका सूत्र Nh₄cl है।

**परिचय-**नौसादर नमक के समान सफेद क्रिस्टलीय चूर्ण होता है। इसके क्रिस्टल का आकार आंखों से ठीक २ नहीं देखा जा सकता ह । साधारणतः ये क्रिस्टल बहुत छोटे और रेशेदार होते हैं। छूने से रूक्ष प्रतीत होते हैं तथा भङ्गुर होते हैं। इन में कोई गन्ध ( Odour ) नहीं होती है। नौसादर स्वाद में नमकीन होता है। यह जल में बहुत अधिक विलेय है। इसको गरम करने से सफेद धुआं निकलता है। यह पिघलने के पहिले ही उड़ जाता है जिस बर्तन में यह गरम किया जाता हो उस बर्तन पर यदि कोई बर्तन पेंदी की ओर से ढक दिया जाय और उसके अन्दर जल भर देने से नौसादर उड़कर उस ठन्डे बर्तन की पेंदी में लगकर जम जावेगा।

रस० ९