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रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)

Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)

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DevanagariHindipublished362 pages

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Page 218

१२८ रसरत्नसमुच्चये—

आर्सेनिक की उपलब्धि—आर्सेनिक के आक्साइड् वा सल्फाइड् को लकड़ी के कोयलों के साथ गरम करने से आर्सेनिक प्राप्त होता है। प्राकृतिक खनिज को आक्सिजन के अभाव में गरम करने से भी आर्सेनिक उद्धनित हो ( Sublime ) इस्पात के समान भूरे रङ्ग के चूर्ण में प्राप्त होता है।

इस तरह से उद्धनित आर्सेनिक चमकीला इस्पात के सदृश भूरे रङ्ग का धातु सा देख पड़ने वाला पदार्थ है। इसके क्रिस्टल षट्फलकीय होते हैं। इनका विशिष्ट घनत्व ५. ६२ से ५. ९६ तक होता है। यह बहुत भङ्गुर होता है। यह ताप ( Heat ) और विद्युत् का सुचालक भी होता है। १००० से० पर यह उद्धनित होना आरम्भ करता और धुँधले रक्त ताप पर बहुत शीघ्रता से सीधे बाष्प में बाष्पीभूत होजाता है। इसके बाष्प के घनत्व से मालूम होता है कि इसके अणु चतुर्बन्धक परन्तु उच्च तापक्रम पर यह द्विबन्धक हो जाता है। इसके वाष्प का रङ्ग पीला ( Yellow ) होता है। इसमें लहसुन सी गन्ध होती है।

आर्सेनिक की पहचान—आर्सेनिक और इसके यौगिक बहुत विषाक्त होते हैं। अतः इसको अल्पमात्रा में पहचानना बहुत आवश्यक होता है। अनेक विधियों से आर्सेनिक अल्प मात्रा में पहचाना जाता है। आर्सेनिक को सल्फाइड के रूप में अवक्षिप्त कर उस अवक्षेप को सुखाकर पोटासियम् साइनाइड के साथ परख नली (टेस्ट-ट्यूब) में गरम करने से आर्सेनिक का कृष्णवर्ण का निक्षेप प्राप्त होता है। इस निक्षेप को वायु में गरम करने से आर्सेनियस् आक्साइड् का श्वेत क्रिस्टलीय उद्धनित ( Sublimate ) प्राप्त होता है। इसको जल में घोल कर उस में सिल्वर नाइट्रेट के विलयन को डालने से सिल्ब आर्सेनाइट् का पीत अवक्षेप (यलोडियो जिट) प्राप्त होता है। आर्सेनिक के दो आक्साइड् होते हैं।

१ आर्सेनियस् आक्साइड् वा आर्सेनिकू ट्राइ—आक्साइड् ( Asy 06 ) ।
२ आर्सेनिक आक्साइड् वा आर्सेनिक पेन्टाक् साइड् ( As2 o5 )

आर्सेनिकू के तीन सल्फाइड् होते हैं। दो प्राकृतिक हैं तथा तीनों कृत्रिम भी होते हैं।

१ आर्सेनिकू डाइ—सल्फाइड् ( मन्सील, रोअलगर् ) As 2 S 2
२ आर्सेनिकू ट्राइ—सल्फाइड् ( हरिताल, ओरपीमेण्ट ) As 2 S 3
३ आर्सेनिकू पेण्टा—सल्फाइड् As 2 S 5

अथ शोधनम्—

पूर्वः पूर्वो गुणैः श्रेष्ठः कारवल्लीफले क्षिपेत्।
स्वेदयेद्दण्डिकामध्ये शुद्धो भवति मूषकः॥ १३१ ॥

इन में पूर्व २ क्रम से श्रेष्ठ माने जाते हैं। सङ्खिया को छोटेछोटे टुकड़े कर