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रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)

Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)

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DevanagariHindipublished362 pages

Page 201 of 362

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तृतीयोऽध्यायः । १११

अथ गैरिकशोधनम्—

गैरिकं तु गवां दुग्धैर्भावितं शुद्धिमृच्छति ॥ ४९ ॥
गैरिकं सत्त्वरूपं हि नन्दिना परिकीर्तितम् ॥ ५० ॥
कैरप्युक्तं पतेत्सत्त्वं क्षाराम्लस्विन्नगैरिकात् ।
उपतिष्ठति सूतेन्द्रमेकत्वं गुणवत्तरम् ॥ ५१ ॥

गैरिक गोदुग्ध से भावना देने पर शुद्ध हो जाता है । नन्दी नामक सिद्ध ने गैरिक को सत्त्व स्वरूप ही बताया है । कुछ लोगों का मत है कि क्षार और अम्ल में स्वेदन करने से गैरिक से सत्त्व निकलता है। गैरिक सत्त्व पारद में मिल जाता है और अधिक गुणकर होता है ॥ ४९-५१ ॥

अथ कासीसरसायनम्—
तत्रादौ कासीसभेदाः—

कासीसं वालुकाद्येकं पुष्पपूर्वमथापरम् ॥ ५२ ॥

कासीस दो तरह का होता है। एक को बालु काकासीस तथा द्वितीय को पुष्प कासीस कहते हैं । बालु कासीस को धातु कासीस भी कहते हैं ॥ ५२ ॥

**विमर्शः—**कासीस को साधारणतया आजकल फेराइ सल्फ ( Ferri Sulph ) अथवा फेरस सल्फेट ( Ferrous Sulphate ) कहते हैं । यह लौह और गन्धक का यौगिक है। यह आजकल प्रायः कृत्रिम ही मिलता है तथा लौह पर गन्धक के तेजाब गन्धकाम्ल ( Sulphuric Acid ) के प्रयोग से तय्यार किया जाता है । प्रायः प्राकृतिक या कृत्रिम कासीस हरे क्रिस्टलीय रूप में पाया जाता है। यह मडुर होता है तथा जल में विलेय (Soluble) है तथा उस में घुल कर विलयन (Solution) बनता है। इसको अग्नि पर गरम करने से इसमें से जल निकलता है इस जल को क्रिस्टलीकरण का जल ( Water of Crystallisation ) कहते हैं । इसी जल के कारण यह क्रिस्टल के रूप में प्राप्त होता है । इस प्रकार तपाने से जल निकल जाने पर जो चूर्ण अवशेष रह जाता है वह सफेद रङ्ग का हो जाता है । अतः जल ही के कारण यह क्रिस्टल के रूप में प्राप्त होता है। इसको ज्यादा गरम करने से इससे प्रथम जल निकलता है फिर सफेद रङ्ग का धुआं निकलता है जिसे यदि द्रवीभूत करके परीक्षा करें तो मालूम होता है कि वह तेल ( oil ) सा गाढा पदार्थ है । इसकी कुछ बूंदे जल में डालकर स्वाद लेने से खट्टा मालूम होता है तथा इस कासीस के द्रवीभूत धुम्र को लकड़ी या कपड़ों पर डालें तो वे झुलस जावेंगे । परीक्षा करने से यह गन्धकाम्ल ( Sulphuric