रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)
Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)
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मद्रास-
के आरकोट ( Arcot ) जिले में आधा मील तक गन्धक का जमाव 'वोलण्डर-पेट ( Wolunderpet ) से कुछेक मील की दूरी पर पोडिया बोलियं ( Wodia Paliam ) नामक जिले में स्थित है।
गोदावरी-
के किनारे २ दलदलों के क्षेत्रों में पानी सूख जाने पर ढेलों के रूप में जमा हुआ गन्धक पाया जाता है। यहां के गन्धक के खनिजों में २८% फी सदी स्वतन्त्र गन्धक और ६८ फी सदी निश्चित रूप में गन्धक पाया जाता है।
ट्रावनकोर-
राज्य में मङ्गामलाई ( Mangamalai ) नामक पहाड़ी पर कान्तमाक्षिक ( Pyrrhotite ) मिलता है इससे गन्धक निकाला जा सकता है। इसी स्थान के पश्चिमी भाग की ओर कुछ दूरी पर एक दूसरा जमाव भी कान्तमाक्षिक का है।
उत्तरी पश्चिमीय सीमाप्रान्त ( North West Frontier Province )
के कोहाट जिले में इन्डस ( Indus ) नदी के पश्चिमी किनारे पर माक्षिकीय ( Pyritous ) मिश्रित स्फटिक ( Alum ) के खपड़े सुधा पाषाण के नीचे जमे पाये जाते हैं। इन खपड़ों से गन्धक निकालने का व्यवसाय किया जाता रहा है। गन्धक निकालने के लिये डमरू यन्त्र का उपयोग किया जाता था। इस यन्त्र द्वारा गन्धक उड़ाकर गन्धक के फूल तय्यार किये जाते रहे हैं।
शिरानी ( Shirani )
नामक जिले में डोमुन्डा ( Domunda ) के पास में रौप्यमाक्षिक के परिवर्तन से गन्धक जमा होता हुआ देखा गया है।
पञ्जाब-
में डेरागाजी खान के सोरीपास नामक स्थान पर गन्धक निकालने का कारोबार चलता था। यहां पर गन्धक गोदन्ती के साथ उष्ण स्रोतों में जमा हुआ दिखाई देता है। गोदन्ती के अन्दर पीत गन्धक के रेशे या शिरायें मिली पाई जाती हैं। कोहाट की भांति डमरू यन्त्र से उड़ाकर शुद्ध गन्धक एकत्रित करने का व्यवहार यहां भी चालू था। गन्धारी पहाड़ के दक्षिणी किनारे पर सफेद क्षेत्रों में भी गन्धक पाया जाता है।
झङ्ग ( Jhang ) राज्य में किराना पहाड़ी के पाषाणों में कान्त माक्षिक ( Pyrrhotite ) के ढेले पाये गये हैं। हुन्डी वाला नामक स्थान की खान में भी रेलवे स्टेशन के पास विमल के नमूने प्राप्त हुये हैं।
मियां वाला ( Mian wala ) ज़िले में पेट्रोलियम प्राप्ति की जमीन में गन्धक