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रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)

Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)

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DevanagariHindipublished362 pages

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इस तरह मैने टीका की विशेषता को संक्षेप में दिखलाई है। विमर्शा-नुक्रमणिका के अवलोकन करने से विज्ञ महानुभावों को विदित हो जायगा कि यह टीका कहां तक उपयुक्त है।

इस टीका के लिखने में चरक, सुश्रुत, वाग्भट, रसेन्द्रसारसङ्ग्रह, भैषज्यरत्नावली, रसतरङ्गिणी, खनिजविज्ञान, प्रारम्भिक रसायन आदि अनेक ग्रन्थों की सहायता प्राप्त हुई है अतः उन ग्रन्थकर्त्ताओं के प्रति परम श्रद्धा प्रकट करता हूं तथा उनके ऋण से कभी भी निर्मुक्त नहीं हो सकता। सर्वप्रथम श्रीमान् विप्रकुलावतंस, हिन्दूविश्वविद्यालय के प्राण, देशोद्धारक, भगवद्भक्त, कुलपति महोदय श्रीमनामना मदनमोहन मालवीय जी के प्रति असीम श्रद्धा प्रगट करता हूं क्यों कि आप ही की साधना से यह प्राच्यनव्यायुर्वेदीय विद्यालय स्थापित हुआ और इसी में मैंने जन्तुशास्त्र, वनस्पतिशास्त्र, भौतिकशास्त्र, रसायनशास्त्र तथा आयुर्वेद और डाक्टरो का उच्चज्ञान प्राप्त करके इस प्रकार की वैज्ञानिक टीका के लिखने में प्रवृत्ति प्रदर्शित की। इस टीका के लिखने में विशेष कर अनेक जटिल स्थलों पर पूज्यपाद गुरुवर्य, चिकित्सकचूडामणि, आयुर्वेद विद्यालय (हिन्दू यूनिवरसीटी) के प्रधानाध्यक्ष श्रीमान् पं० सत्यनारायण जी शास्त्री ने चिकित्सा के सिद्धान्तों में तथा खनिजविषयों पर श्रीमान् कविराज प्रतापसिंह जी (रसशास्त्राध्यापक आयुर्वेद फार्मेसी सुपरिन्टेण्डेण्ट) ने अत्यन्त सहायता प्रदान की है अतः उक्त दोनों महानुभावों के प्रति मैं परम श्रद्धा प्रगट करता हूं। साथ ही साथ आयुर्वेद कालेज के पाश्चात्य चिकित्साशास्त्र के अध्यापक तथा अनेक ग्रन्थों के लेखक आयुर्वेदाचार्य डा० भास्कर गोविन्द घाणेकर जी के प्रति परमश्रद्धा प्रगट करता हूं क्यों कि आप ही ने सर्व प्रथम अपनी सुकृतियों के द्वारा हम लोगों की इस नवीनप्रकार की टीका लेखन पद्धति में रुचि उत्पन्न की तथा एक मार्ग सा बना दिया। इनके अतिरिक्त डा० मुकुन्द स्वरूप जी वर्मा (सरसुन्दरलाल हास्पिटल सुपरिन्टेण्डेण्ट तथा वायस-प्रिंसिपल आयुर्वेदकालेज तथा सर्जरी के प्रोफेसर) तथा पं० जगन्नाथजी शर्मा वाजपेयी एम० ए० (प्रोफेसर आयुर्वेद कालेज) तथा अन्य समस्त-