Skip to content
SarvaKosh
रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)

Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)

Report a copyright issue

DevanagariHindipublished362 pages

Page 14 of 362

Read in context
Page 14

[ ८ ]

[ ३ ]
तृतीयाध्याय में लिखित गन्धकादिक अष्ट उपरसों की उपलब्धि, भेद, प्राप्तिस्थान आदि विषयों का वर्णन किया गया है ।

[ ४ ]
एकादशाध्याय में पारद के संस्कारों की सब विधियां टिप्पणी के रूप में प्रत्येक स्थान पर लिखी गई हैं ।

[ ५ ]
प्रत्येक ज्वर के लक्षण, प्रत्येक ज्वर का पथ्य तथा अपथ्य का विशेष उल्लेख किया गया है । साथ २ रसनिर्माण में जो २ पारिभाषिक शब्द आये हैं उन की टिप्पणी में परिभाषा लिख दी हैं ।

[ ६ ]
इसी तरह रक्त पित्त, कास, श्वास, हिक्का, स्वरभङ्ग, राज्यक्ष्मा, छर्दि, हृद्रोग, मदात्यय, अर्श, उदावर्त, अतीसार, ग्रहणी, मूत्रकृच्छ्र, प्रमेह, वृद्धि, गुल्म, उदररोग, पाण्डु, शोथ, विसर्प, कुष्ठ, वातव्याधि, वातरक्त, भगन्दर, नेत्र रोग आदि समस्त रोगों के विषय में विमर्श लिख दिया है जिस में सब रोगों का पथ्यापथ्य तथा जहां तहां डाक्टरी मत से रोग भेद आदि का वर्णन भी किया गया है ।

[ ७ ]
सर्व प्रकार के विषों का भेद, उन के शोधन की विधि तथा प्रयोगों का वर्णन किया गया है ।

[ ८ ]
सर्व प्रकार के क्षुद्र रोगों का पृथक् २ लक्षण, पृथक् २ चिकित्सा तथा पथ्यापथ्य का अन्य रसग्रन्थों की सहायता से पूर्ण वर्णन कर दिया है ।

[ ९ ]
कहीं २ पर अनेक रोग तथा उन की चिकित्सा का प्रक्षिप्त रूप से आवश्यक होने के कारण वर्णन कर दिया गया है ।

[ १० ]
रसायन और वाजीकरण का लक्षण, कुटीनिर्माणविधि, चरकोक्ताचार, रसायन आदि अनेक उपयुक्त विषयों का चरक सुश्रुतादि ग्रन्थों के आधार पर वर्णन किया गया है ।