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रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)

Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)

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DevanagariHindipublished362 pages

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प्रथमोऽध्यायः । ५ । ५१

किंवदन्ती प्रसिद्ध है। यहां पर पारद के खनिजों का बहुत बड़ा व्यापार रहा है। सन् १५६६ से १६७० के लगभग स्पेन राज्य ने २८०००० डयूकॅटस (लगभग ११७००० पाउन्ड) देकर यहां की पारद की खान खरीद ली थी। यह खान २२० फुट लम्बी, १११ फुट चौड़ी और ४४५ फुट गहरी थी। बाद में निरन्तर कार्य होते रहने से यहां की गहराई १४०४ फुट तक होगई थी। इस खान का काम बे सिलसिले रहा, पर खुदाई का काम खूब होता रहा है। यहां पर एक स्थान की खुदाई मुरब्बा ४००० गज और उपरितल पर गहराई १०० से २० फुट की है। सन् १६०१ से १९०३ तक इस खान से माल इस प्रकार निकाला गया है।

समयटोटल पारद की उत्पत्तिवार्षिक उत्पत्ति क्विन्टल्स मेट्रिकरन मेंवार्षिक उत्पत्ति फ़्लास्क के हिसाब में
१६०१—१७८९१०४०४६९२१८६४२४
१७९०—१८४३६५७६६५५१६३०
१८४४—१९०३९००००७०६२२६

यहां पर की गहराई की नाप करने के लिये २१३ फुट गहरा कूप खोदने के लिये प्रयत्न किया गया किन्तु वह १६७ फुट पर जाकर विफल हुआ, तब अन्यत्र प्रयत्न किया गया। वहां पर ९८५ फुट गहराई तक पहुंच कर फिर पूर्व खनित भूमि के अन्तराल में पहुंचने का प्रयत्न किया जा रहा है। यदि यह खुदाई पूर्ण हो गई तो ३९३७ फुट की गहराई होगी। इस प्रयत्न के लिये भट्टियां (Furnaces) तय्यार हो गई हैं। इस खान के पास में उष्ण जल के कई स्रोत हैं।

जुनिन (Junin)

इस विभाग के योलि (youli) ज़िले में स्फटिक की शिराओं में और रेणु पाषाणों में हिङ्गुल जमा हुआ पाया जाता है। हिङ्गुल के सहयोग में रौप्य माक्षिक पाया जाता है। यहां पर हिङ्गुल प्राप्ति के स्थान के समीप उष्ण जल का स्रोत है और उसकी तह पर प्राकृतिक गन्धक पाया जाता है। इस जिले में एक स्थान अनकाचस (Ancachs) कहलाता है। वहां पृथ्वी की शिराओं में गेलेना, यशद, रौप्य-माक्षिक और सुवर्णमाक्षिक के साथ साथ हिङ्गुल भी पाया जाता है।

हुवानुको (Huanuco)

इस विभाग के चोन्टा (Chonta) ज़िले में तीन जमाव हैं जिनमें रौप्यमाक्षिक, यशद, गेलेना, हिंगुल, टेट्राहिड्रेट (Tetrahedrite) आदि रेणु-पाषाण और स्फटिक-पाषाणों के साथ पाये जाते हैं।

वीनेजुए (Venezue)

सन् १९०४ में यह सूचना प्रकाशित हुई थी कि यहां उष्ण स्रोत के जमाव के