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रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)

Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)

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DevanagariHindipublished362 pages

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प्रथमोऽध्यायः । ४९

उटाह ( Utah )

यहां पर मृत्तिका जाति के हिंगुल से बहुत मात्रा में पारद निकालने का अध्य-वसाय होता रहा है। यहां पर सोने की खान में से ही पारद के खनिजों के निकास का पता लगा है। इस खान में टिमानाइट ( Tiemannite Hgsse ) और ओना-फ़्राइट ( Ono frite Hgsse ) नामक पारदीय खनिजों से भी थोड़ा पारद निकाला गया । १९०६ में १११३ फ्लास्क पारद निकाला गया था ।

वाशिंगटन Washington )

यहां के प्रान्तों में भी पारद की पर्याप्त निकासी हुई है तथापि १९१२ के उपरान्त पारद के भाव के गिर जाने से और निकासी का खर्च बढ़ जाने से इस का व्यवसाय मन्द पड़ गया है। स्पेन की सरकार अपने यहां पारद की निकासी अधिक बढ़ाने के लिये नवीन आविष्कारों का बाहुल्य से उपयोग कर रही है। ऐसी दशा में अमेरिका के संयुक्त राज्य के पारद व्यवसाय को अवश्य हानि पहुंचेगी। यहां पर १०% फीसदी वर्तमान में पारद निकासी पर कर लगता है । सन् १९१४ से १९२१ तक नीचे लिखी सारणी के अनुसार संयुक्त राज्य में पारद निकाला गया है। यह मान ७५ पाउण्ड फ्लास्क का है ।

सन्केलिफ़ॉर्नियाटेक्सासनिवादाओरेगनऐरजौना इडाहो, वाशिंगटनटोटलफ्लास्क
१९१४११३०३३१९६२०८९——१६५६८"
१९१५१४२८३४४२३(अ)२३२७(क)—२१०३३"
१९१६२१०४६६३०६(ब)२१९८३७८५(ख)२९९३२"
१९१७२३९३८१०७९१९९७३१३१२०(ग)३६१९९"
१९१८२२६६४८४५११०४४७०२२२(घ)३२८८३"
१९१९१९२०५५०१९७५६४३५—२१४१९"
१९२०९८४९३४३६८३२४—१३३९२"
१९२१३०५५३१२३१००—१६३३९"

रस० ४