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रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)

Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)

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DevanagariHindipublished362 pages

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रसरत्नसमुच्चये—

खनिज इस प्रकार निकल कर जमा होते हैं उनके जमने का क्रम डा० सी० जी केलिस प्रोफेसर इम्पीरियल कालेज लण्डन के मतानुसार यह है—सब के नीचे पातालिक आग्नेय पाषाण ग्रेनाइट ( Granite ) और उसके ऊपरी भाग में एक ओर जलज, पारद, तुरमलीन, पुखराज, वंग और टगस्टन रहते हैं तथा दूसरी ओर भारी धातु जैसे ताम्र, नाग, यशद, सुवर्ण, रजत, और रौप्यमाक्षिक आदि रहते हैं। इसका नक़्शा वे इस प्रकार बनाते हैं।

पारद के खनिज 
—तुरमलीन
        पुखराज
           वंग
             टंगस्टन
                 ताम्र
                     नाग
                     यशद
                             सुवर्ण
                                 चांदी
                                         माक्षिक

जो लोग ऐसी खानों को खनते हैं वे प्रायः एक के बाद दूसरे खनिज को निकाल कर लाभ उठाते हैं; सम्भवतः इसी का मूल ग्रन्थ के पाठ में (सञ्जातास्तन्मलाद्धाता- द्धातवः सिद्धिदायकाः) इस प्रकारका वर्णन है। यह भी निश्चित है कि जहां पर पारद की खाने हैं वहां पर किसी किसी स्थान पर नल के आकार के कूप भी मिलते हैं। यूनाइटेड स्टेट्स आफ अमेरिका में भी पारद के खनिजों में जलाकार कूप मिलते हैं जिनकी समानता “शतयोजननिम्नास्ते (विस्तीर्णाः) जाताः कूपास्तु पञ्च च” इस प्राचीनोक्ति में अक्षरशः सत्य मिलती जुलती है। उन देशों में पारद के कूप २४५० फीट तक गहरे हैं। नीचे के अङ्ग्रेजी अवतरण से ज्ञात होता है कि भूगर्भ के अन्दर सौ मील की खुदाई पारद निकालने की हुई है। प्राचीन पारदोत्पत्ति के अन्दर पांच कूपों का उल्लेख है परन्तु वहां पर इस समय अठारह कूप ( Shafts ) हैं जिनसे पारद निकाला जाता है। यह सम्भव है कि उस समय में पाञ्च कूपों का ही पता लगा हो।

ITALY

"In the Montebuono mine, according to R. Rosenlecher Miocene sands overlie and conceal Nummulitic Limestone. At a depth of 100 ft. a great vertical crevice about 6 ft. wide was struck, filled with Miocene sands and clays, impregnated with cinnabar in an extremely fine state of division. In the immediately neighbouring