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पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 7

पलटू साहिब की बानी भाग १
( कुंडलिया )
॥ गुरुदेव ॥
( १ )
पूरा सतगुरु मिलै जो पूजै मन की आस ॥
पूजै मन की आस पिया को देय मिलाई।
छूटा सब जंजाल बहुत सुख हम ने पाई॥
देखा पिय का रूप फिरा अहिबात¹ हमारा।
बहुत दिनन की राँड़ माँग भर सेंदुर धारा॥
सासु ननद² को मारि अदल में दिहा चलाई।
उन कै चलै न जोर पिया को मैंहि सुहाई॥
पिय जो बस में भये पिया को जादू कीन्हा।
ऐसी लागी नेह पिया तब मोको चीन्हा॥
प्रसाद पिया को पाय के मिले गुरु पलटूदास।
पूरा सतगुरु मिलै जो पूजै मन की आस ॥
( २ )
सतगुरु सिकलीगर मिलैं तब छुटै पुराना दाग ॥
छुटै पुराना दाग गड़ा मन मुरचा माहीं।
सतगुरु पूरे बिना दाग यह छूटै नाहीं॥
झाँवाँ लेवै जोग तेग को मलै बनाई।
जौहर देय निकार सुरत को रंद चलाई॥
सब्द मस्कला करै ज्ञान का कुरँड³ लगावै।
जोग जुगत से मलै दाग तब मन का जावै॥
पलटू सैफ⁴ को साफ करि बाढ़ धरै बैराग।
सतगुरु सिकलीगर मिलैं तब छुटै पुराना दाग ॥
(१) सुहाग। (२) माया और बासना। (३) एक तरह का पत्थर जो सिकल
करने के काम में आता है। (४) तलवार।