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सर्वकोश
पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 14

८ कुंडलीया
पलटू नाम खुदाय का यही सदा है पाक ।
हाथी घोड़ा खाक है कहै सुनै सो खाक ॥
( १६ )
हाथ जोरि आगे मिलै लै लै भेट अमीर ॥
लै लै भेट अमीर नाम का तेज बिराजा ।
सब कोउ रगरै नाक आइ कै परजा राजा ॥
सकलदार¹ मैं नहीं नीच फिर जाति हमारी ।
गोड़ धोय षट करम बरन पीवै लै चारी ॥²
बिन लसकर बिन फौज मुलुक में फिरी दुहाई ।
जन महिमा सतनाम आपु में सरस बढ़ाई ॥
सत्तनाम के लिहे से पलटू भया गँभीर ।
हाथ जोरि आगे मिलै लै लै 'भेट अमीर ॥
॥ सामर्थ ॥
( २० )
अदल होइ बैकुण्ठ में सब कोइ पावै सुक्ख ॥
सब कोइ पावै सुक्ख अमल है तेज³ तुम्हारा ।
भौसागर के बीच लगै ना उतरत बारा ॥
लेइ तुम्हारो नाम ताहि को बार न बाँकै ।
खुले-बंद⁴