निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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सिद्धांत के इतने पक्के हैं आप
आपने एक ज़मीन ख़रीदी। 8 लाख की ज़मीन थी। फ़र्द कटवाना था तो पटवारी 10 हज़ार माँग रहा था और बड़े अधिकार से माँग रहा था घूस। आपने अपने नामी तहसीलदार से कहा कि घूस नहीं देना है, यह तय है; चाहे फ़र्द न हो, मंजूर है। आपने 8 लाख दाँव पर लगा दिये, पर 10 हज़ार घूस नहीं दी। सिद्धांत ख़त्म हो रहा था, इसलिए किया।
इंस्पेक्टर बोला-
दो साल नौकरी आपने की है
सच है, कर्त्ता केवल आप ही हैं, बाकी सब तो माध्यम बन जाते हैं। अंतर केवल इतना है कि कोई-कोई इस रहस्य को समझ नहीं पाता है जबकि कुछ इस बात को समझ जाते हैं, महसूस कर लेते हैं।
सुरेंद्र सिंह इंस्पेक्टर को दिमाग़ी नुक़्स हो गया था। वो आपके पास आया; कहा-गुरु महाराज! अब नौकरी नहीं करनी है। आपने उसकी आँख में देखा। आप जान गये कि क्या बात है। आपने कहा कि नौकरी पूरी करो। उसके 2 साल रह गये थे। आपने उसे चाॅबी भर दी। पर आपने ऐसा नहीं कहा कि चाॅबी भर दी है, जाओ। यह नहीं बोला कि तथास्तु।
वो पूरी नौकरी करके आया तो एक लाख रूपया लाकर चरणों में रखा। वो बोला कि मैं आपसे बेइमानी कर रहा हूँ। यह दो साल नौकरी आपने की है। मैं बेइमान बनकर आपको केवल बेसिक तनख़्वाह दे रहा हूँ।
वापिस आना ही पड़ता है
आपको कोई छोड़ नहीं सकता है। चाहे छोड़कर चला जाए, पर फिर वापिस आना पड़ता है। यदि हज़ारों गुरु भी कर आए तो भी वापिस आपके पास आना पड़ेगा।