निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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करेगा तो बीमार पड़ जायेगा। पर आप हैं कि फिर सत्संग भी 5-5 करने हैं दिन में। आराम कब करना है, कोई ख़बर नहीं है।
सर्दी हो या गर्मी, बारिश हो या तूफान, पर आपको कभी किसी ने रुकते नहीं देखा, कभी आपका कोई सत्संग स्थगित नहीं हुआ। यदि कोई हुआ भी तो उसका कोई अन्य ही कारण रहा। फिर इतना ही नहीं, कभी आपको बुख़ार हुआ तो भी आपने सत्संग नहीं छोड़ा। 104° बुख़ार होने पर भी आप सत्संग में हाज़िर नज़र आए और मुस्कराते हुए नज़र आए।
फिर दिन में 4-5 सत्संग करने, जिनमें से हरेक डेढ़ से दो घण्टे तक होता है। यानी दिन-भर बोलते ही रहना है। बोलने में भी आप कभी नहीं थकते हैं। कोई प्रोफेसर, कोई अध्यापक इतना नहीं बोल पायेगा। फिर यह नहीं कि हफ्ते में एक छुट्टी। कोई भी छुट्टी नहीं है। हफ्ते की बात नहीं है, पूरे साल में एक भी छुट्टी नहीं। आराम की चिंता ही नहीं है। हर दिन काम करना ही है। दिन हो रात हो, लगे ही रहना है। चाहे कड़कती धूप हो या फिर कड़ाके की ठंड पड़ रही हो, आप नहीं रुकते हैं। तूफान आए या फिर बरसात हो रही हो, आपको रुकते नहीं देखा जा सकता है। आपकी गाड़ी सड़कों पर हर हाल में दौड़ती ही नज़र आयेगी। आपको सत्संग के लिए निकलना ही है, चाहे सब लोग मौसम के कारण घरों में छिपकर क्यों न बैठे हों।
....फिर सत्संग करके कभी-कभी राँजड़ी पहुँचते-2 रात के 12 या एक भी बज जाते हैं। और वहाँ भी समय नहीं होता है। वहाँ भी आपके इंतज़ार में कई श्रद्धालु अपनी समस्याओं को लेकर पहुँचे होते हैं और सुबह तक का इंतज़ार करने वाले नहीं होते हैं। आपको उनसे भी निबटना है, सबकी बात सुनकर फिर कभी 1 तो कभी 2 बजे आप आराम करने जाते हैं। अब वो आराम भी हमारे देखने के लिए है। सच तो यह है कि तब ही तो आप अपने अध्यात्म खेल शुरू करते हैं। तब