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निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

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निराले सद्गुरु
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चेले भी आखिरकार थक ही जाते हैं। पर आप खुद कभी नहीं थकते हैं और जब चाहते हैं तो अपनी सुरति देकर अपनी संगत को भी चेतन कर देते हैं। यह चीज़ें लालची लोग कभी समझ नहीं पायेंगे, क्योंकि आखिर उनका दिमाग़ है ही शैतानी। वे शैतानी बातें ही सोच-समझ सकते हैं। वो आरामपरस्त हैं, स्वार्थ के लिए, पैसे के लिए प्रोग्राम देते हैं जबकि आप परिश्रमी हैं, परमार्थ के लिए, जीवों को चेतन करने के लिए यह काम कर रहे हैं।

यदि आप एक इच्छा करें तो उन्हें नानी-परनानी भी याद आ जाए, पर आप यह काम नहीं करना चाहते हैं। जब निरंजन आपसे भयभीत रहता है, फिर वे बेचारे किस खेत की मूली हैं! पर अन्तर यह है कि निरंजन को आपकी शक्तियों की पूरी जानकारी है; आप क्या कर सकते हैं, वो समझता है। इसलिए सीधे-सीधे आपसे कोई पंगा न लेकर अपने उपासकों के द्वारा यह काम करता है।

जब 21 ब्रह्माण्डों पर कब्जा करने वाले, प्रलय करने वाले निरंजन का आपके आगे कुछ बस नहीं चलता है तो इन बाबों की क्या बात करनी! ये बेचारे तो हैं ही नहीं। इनका तो होना या न होना एक समान है। इनमें रूहानियत का कोई जलवा ही नहीं है, इसलिए बाहरी रुकावटें देने में लगे हुए हैं। जब रूहानियत का कोई लक्षण ही नहीं है तो फिर छल-कपट करना तो इनकी मजबूरी हो जाती है। इन्हें डर है कि धूर्तों वाला काम नहीं किया तो सारी पब्लिक ‘साहिब-बंदगी’ पंथ में चली जायेगी। उन्हें इस बात का भय है।

सेवा है आपका लक्ष्य

आपका सारा समय परमार्थ में, सेवा में व्यतीत होता है। अपने लिए आपके पास कोई समय नहीं है। सबसे बड़ी बात है कि सेवा के लिए आप सही पात्र को चुनते हैं।