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निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

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24 साहिब बन्दगी

दुनिया समझेगी इन बातों को। आख़िर आप जो कहते हैं कि जो वस्तु मेरे पास है, वो कहीं नहीं है। इसमें वज़न है। अन्य बड़े-बड़े पंथ वाले जानते हैं कि उनके पास कुछ नहीं है, केवल किताबी बातें हैं, इसलिए साहिब बन्दगी का विरोध उनकी मजबूरी है। जो ऐसा नहीं करते, वे अच्छे हैं। भक्तों की यही निशानी होती है कि खुद भी आगे बढ़ो और दूसरों को भी आगे बढ़ने दो। अपना भी कल्याण करो, दूसरों का भी कल्याण करो। जो केवल अपने कल्याण तक सीमित है, वो भक्त नहीं हो सकता है। इसलिए जो पंथ विरोध करने वाले हैं, उनमें से किसी का लक्ष्य पैसा है, किसी का लक्ष्य इज्जत है, किसी का लक्ष्य रोमांस है, किसी का लक्ष्य राजाओं की तरह रहना है।

आप इन चीज़ों से परेशान नहीं होते, पर समाज को समझना होगा कि क्या ऐसी हरकतें कभी कोई भक्त कर सकता है! यानी भारत के बड़े-बड़े धार्मिक पंथों में भक्त नहीं रह रहे! इस रहस्य को समझना होगा। सत्य है, ये लोग भक्त नहीं हैं। एक भक्त दूसरे भक्त को कष्ट नहीं दे सकता, क्योंकि वो सबमें एक आत्मा देखता है। उसकी दृष्टि विश्व व्यापक होती है। आपने अपने विरोधियों के ख़िलाफ़ भी कोई कार्यवाही क्यों नहीं की, इसका एक ही कारण है और वो यह कि आप कहते हैं कि वो भी हमारे ही हैं। कितनी प्यारी सोच है आपकी! दुनिया कब सच्चे संत को पहचानेगी!

यदि आप किसी पेड़ पर बैठकर सत्संग करेंगे तो भी आपकी संगत आपके पास आयेगी। पेड़ों पर बैठकर किसी जंगल में सत्संग सुनना पड़ेगा तो भी सुनेगी। आपने जो रंग दिया है, वो उतरने वाला नहीं है; फिर बाकी किसी का रंग नहीं चढ़ सकता है, सब फीका लगता है।

पाखण्डियों के इन गंदे कामों से आपकी संगत और अधिक मजबूत होती है। इसलिए सच में ये निंदक आपकी संगत का भला करने वाले हैं, उन्हें भक्ति में अधिक मजबूत करने वाले हैं। फिर इसी से संगत