Skip to content
SarvaKosh
नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

by देवर्षि नारद

Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished304 pages

Page 51 of 304

Read in context
Page 51

वस्तु से होने वाला लाभ, (6) भाट-चारण आदि को प्रतिज्ञात दान, पुरस्कार आदि
तथा (7) द्यूत-क्रीड़ा में जीता गया धन।
इनकी वसूली में विलम्ब होने पर किसी प्रकार के अतिरिक्त धन-ब्याज
आदि-की मांग नहीं की जा सकती।
मिथ्याभियोगिनो ये स्युर्द्विजानां शूद्रयोनयः।
तेषां जिह्वां समुत्कृत्य राजा शूले निधापयेत् ॥ 37 ॥
राजा को ब्राह्मण आदि उच्च जाति के लोगों पर मिथ्या आरोप लगाकर उन्हें
कलंकित-अपमानित करने वाले शूद्र आदि निम्न जाति के लोगों की जिह्वा को
कटवाकर उन्हें सूली पर लटकवा देना चाहिए।
मृत्यु-दण्ड देने से पूर्व अपशब्द कहने वाली जीभ को कटवाने का उद्देश्य
उन्हें पीड़ित करना है, अर्थात् ऐसा कठोर दण्ड देना है कि कोई भी ऐसी धृष्टता
करने का दुस्साहस ही न कर सके।
टिप्पणी- प्राचीन भारत में इस प्रकार के कठोर दण्ड की व्यवस्था के
कारण ही समाज अनुशासित था तथा वर्ण-व्यवस्था प्रतिष्ठित थी।
असहाय भाष्यकार के अनुसार यदि राजा श्रेष्ठजनों को मिथ्या कलंकित करने
वाले उच्छृंखल छोटे लोगों को नियन्त्रित नहीं करता, तो वह कर्तव्य-च्युत माना
जाता है अथवा अव्यवस्था को जन्म देने का दोषी तथा पापी कहलाता है-
ये क्षुद्राः विक्षेपकारिणो भवन्ति तान् राजा खण्डितजिह्वान् कृत्वा शूले
निधापयेत्। ततस्तेन पापेन न गृह्यते। अन्यथा शिष्ट पालनार्थं दुष्टनिग्रहार्थं
करग्राहिणो राज्ञः एव सः दोष इत्यर्थः।
आज्ञा लेखः पट्टकः शासनं वा
आधिः पत्रं विक्रयो वा क्रयो वा।
राज्ञे कुर्यात् पूर्वमावेदनं य-
स्तस्य ज्ञेयः पूर्वपक्षो विधिज्ञैः ॥ 38 ॥
विधिवेत्ताओं की दृष्टि में कानून का आदर करने वाला तथा किसी प्रकार के
विवाद के उपस्थित होने पर पूर्वपक्षी (वादी) कहलाने का अधिकारी वही है, जो
निम्नोक्त रूप से नियमों का पालन करता है-

  1. किसी सम्पत्ति के क्रय-विक्रय से पूर्व राजा से लिखित आवेदन करके
    अनुमति प्राप्त करना।
  2. क्रय-विक्रय को पञ्जीयन कराना।
  3. लेन-देन के सभी मामलों में राजकीय अभिमत-पत्रों (स्टाम्प-पेपर्स) का
    प्रयोग करना।
  4. शासकीय अभिलेख में प्रविष्टि कराना तथा
    नारदस्मृति / 49