नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
by देवर्षि नारद
Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)
DevanagariSanskritpublished304 pages
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हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।
युद्ध में विजयी होने पर पृथ्वी पर शासन का और मृत्यु हो जाने पर स्वर्ग में
वास का अधिकार सुनिश्चित है। यहां कर्तव्यपालक राजा के लिए जीवनकाल में
कमनीय कीर्ति और मरने पर परमगति सुरक्षित हो जाती है। इसके अतिरिक्त शास्त्र
यह भी कहता है "कीर्तिर्यस्य सः जीवति" यशस्वी तो अमर हो जाता है।
॥ प्रथम अध्याय समाप्त ॥
नारदस्मृति / 39