नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
by देवर्षि नारद
Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)
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Read in contextदिव्यान्याप्यप्रमाणानि नीयन्ते वाक्यवञ्चकैः ।
देशकालप्रमाणादावप्रमादो भवेदतः ॥ ३० ॥
वञ्चक, दुर्जन तथा वाणी-कुशल आदि चतुर पुरुष मानवीय प्रमाणों—साक्षी,
लेख तथा अधिकार आदि—के अभाव में अग्नि या जल आदि दिव्य प्रमाणों की
उपेक्षा करके अपना पक्ष प्रस्तुत करने लग जाते हैं। अतः विवाद से सम्बन्धित
व्यक्तियों को देश, काल और प्रमाण आदि के सम्बन्ध में विशेष सावधान रहना
चाहिए, प्रमाद कदापि नहीं करना चाहिए, अन्यथा उनके द्वारा ठगे जाने की
सम्भावना बढ़ जाती है।
तत्र शिष्टं छलं राजा मर्षयेद् धर्मसाधनः ।
भूतमेव प्रपद्येत धर्ममूला यतः श्रियः ॥ ३१ ॥
राजा की लक्ष्मी और कीर्ति धर्म पर आश्रित होती है, अर्थात् धर्म की रक्षा
करने से ही राजा के यश का प्रसार और धन का विस्तार होता है। अतः राजा के
लिए न्याय के अनुसार व्यवहार करना आवश्यक है। उसे देखना चाहिए कि वादी
का अभियोग मिथ्या है अथवा सत्य है। उसे सत्य के निर्णय के लिए सदैव सत्पथ
का ग्रहण करना चाहिए, अर्थात् राग-द्वेष से सर्वथा मुक्त होकर निष्पक्ष दृष्टिकोण
अपनाना चाहिए।
टिप्पणी — असहाय भाष्यकार के अनुसार—यदि मिथ्या अभियोग लगाने
वाला वादी अपने अपराध को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर लेता है और
पश्चात्ताप करता है, तो राजा को उसे दण्डित नहीं करना चाहिए, अपितु क्षमा कर
देना चाहिए। भाष्यकार ऐसे छल को प्रमादवश शिष्ट व्यवहार मानने वाले को क्षमा
का पात्र घोषित करते हुए लिखते हैं।
यदि वादी स्वकीयं प्रमादाभिहितं वचनं ज्ञात्वा वटपत्रकग्रामं च सम्यक्
स्मृत्वा तमेव वटपत्रकग्रामेस्थितसंव्यवहारं कीर्तयति, तदा वादिना तत्स्वकीयं
प्रमादाभिहितं छलं शिष्टं कथितमित्यर्थः। तं वादिशिष्टच्छलमनमर्षयेद्
धर्मसाधनः क्षमयेदित्यर्थः ।
धर्मेणोद्धरतो राज्ञो व्यवहारान् कृतात्मनः ।
सम्भवन्ति गुणाः सप्त सप्त वह्नेरिवार्चिषः ॥ ३२ ॥
अग्नि की सात रश्मियां (ज्योति-किरणें) होती हैं। सूर्य को भी 'सप्तरश्मि'
कहा गया है। वस्तुतः जिस प्रकार रंगों की संख्या सात है, उसी प्रकार सूर्य की
किरणें तथा अग्नि-शिखाएं भी सप्तवर्ण होती हैं। धर्म के अनुसार व्यवहार देखने
वाले राजा को भी अग्नि की सात रश्मियों के समान अगले पद्य में निर्दिष्ट सात गुणों
के विकास का लाभ मिलता है।
नारदस्मृति / 25