नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
by देवर्षि नारद
Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)
DevanagariSanskritpublished304 pages
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विरुद्ध उपलब्ध किसी भी साक्ष्य अथवा प्रमाण को अत्यन्त गम्भीरता से लेना
चाहिए तथा सन्दिग्ध व्यक्ति से शपथपूर्वक गहरी पूछताछ करनी चाहिए।
चौराणां भक्तदा ये स्युस्तथाप्युदकदायकाः ।
आवासदा देशिकाश्च तथैवोत्तरदायकाः ॥ 13 ॥
क्रेतारश्चैव भाण्डानां प्रतिग्राहिण एव च।
समदण्डाः स्मृतास्ते तु ये च प्रच्छादयन्ति तान् ॥ 14 ॥
- चोरों को अन्न, जल तथा आवास जुटाने वालों।
- चोर से पूछे प्रश्नों का उसकी ओर से उत्तर देने वालों।
- चोरी के सामान का क्रय-विक्रय करने वालों।
- चोरों अथवा चोरी के समान को छिपाने वालों तथा
- चोरों को उसकी खोज के लिए सरकार द्वारा उठाये जा रहे पगों की सूचना
देने वालों को भी चोर समझना तथा चोरों के लिए निर्धारित दण्ड से दण्डित करना
चाहिए।
राष्ट्रेषु राष्ट्राधिकृताः सामन्ताश्चैव चोदिताः।
अभ्याघाते तु मध्यस्था यथा चौरास्तथैव तेः ॥ 15 ॥
राजा द्वारा चोरों को पकड़ने के लिए नियुक्त तथा सूचना मिलने पर त्वरित
कार्यवाही न करने वाले सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को, चोरी की
जानकारी रखने वाले चोरों के पड़ोसियों को तथा चोरी का पता चलने पर 'बचाओ'
की गुहार सुनने पर वहां से भाग खड़े होने वालों को भी चोर समझना और चोर के
लिए निर्धारित दण्ड देना चाहिए।
गोचरे यस्य मुष्येत तेन चौराः प्रयत्नतः ।
मृग्या दाप्योऽप्यथवा मोषं पदं यदि न निर्गतम् ॥ 16 ॥
गोचारण क्षेत्र में हुई चोरी के लिए उस क्षेत्र की नाकाबन्दी कर देनी चाहिए,
अर्थात् चोर को बाहर निकलने-भागने ही नहीं देना चाहिए। यदि चोर भागने की
चेष्टा नहीं करता है, चोरी का सामान स्वामी को लौटा देता है और अपने अपराध
के लिए क्षमा-याचना करता है, तो उसकी प्रताड़ना करने के पश्चात् उसे छोड़ देना
चाहिए।
निर्गते तु यदा यस्मिन्नष्टेऽन्यत्र न पातयेत्।
सामन्तान्मार्गपालांश्च दिक्पालांश्चैव दापयेत् ॥ 17 ॥
चोर के गोचारण क्षेत्र से बाहर निकलकर भाग जाने पर आस-पास चारों
ओर नियुक्त रक्षकों को चोर को ढूंढ़ने का दायित्व सौंपना चाहिए। रक्षकों के
विफल होने पर उनसे ही चोरी के सामान की भरपाई करानी चाहिए।
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