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नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

by देवर्षि नारद

Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished304 pages

Page 267 of 304

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Page 267

चोर से सत्य उगलवाने के लिए निम्नोक्त रूप से प्रश्न पूछने चाहिए—

  1. चोरी के समय तुम कहां थे ?
  2. चोरी का स्थान तुम्हारे निवास से कितनी दूर है ?
  3. क्या चोरी के समय तुम चोरी के स्थान की दिशा में थे अथवा किसी अन्य
    दिशा में थे ?
  4. तुम्हारा वास्तविक नाम क्या है ? क्या तुम सभी स्थानों पर इसी नाम से
    जाने जाते हो ?
  5. तुम्हारी जाति क्या है ?
  6. तुम्हें आश्रय देने वाले कौन-कौन से लोग हैं और तुम्हारा उनसे क्या
    सम्बन्ध है ?
  7. तुम्हारे नौकर-चाकर कौन-कौन से हैं और कहां हैं ?
    इसके अतिरिक्त चोर पर दबाव बनाये रखने के लिए उसके बन्धु-बान्धवों
    तथा नौकर-चाकरों को बांधकर रखना चाहिए।
    वर्णस्वराकारभेदात् संसदि त्वनिवेदनात्।
    अदेशकालदृष्टत्वाद्वासस्याप्यविशोधनात् ॥ 10 ॥
    असद्व्ययात् पूर्वचौर्यादसत्संसर्गकारणात्।
    लेख्यैरप्यवगन्तव्या न होढेनैव केवलम् ॥ 11 ॥
    चोरी के सामान के मिलने के अतिरिक्त निम्नोक्त अन्य लक्षणों से व्यक्ति के
    चोरी में लिप्त होने का अनुमान लगाना चाहिए—
  8. चेहरे के रंग का उड़ना, फीका व पीला पड़ना।
  9. स्वर का बदलना, कांपना, घबराहट होना।
  10. चेहरे का ऊपर न उठा पाना, अर्थात् अपराध-बोध से ग्रस्त होना।
  11. सभा में बोल न पाना, जिह्वा का लड़खड़ाना, वाणी का अवरुद्ध हो जाना।
  12. ग़लत स्थान—सुनसान, खण्डहर, जंगल, बाग़, क़िला, श्मशान आदि में
    ग़लत समय—गरमी की दोपहरी या रात के अंधेरे में घूमता-भटकता दीखना।
  13. भद्दी हंसी हंसना।
  14. अनाप-शनाप और बेकार की वस्तुओं पर ख़र्च करना।
  15. व्यसनों—जुआ, शराब, वेश्यागमन—में ग्रस्त होना।
  16. कलंकित (बदनाम) चोरों के साथ सम्बन्ध रखना तथा
  17. चोरी से सम्बद्ध किसी लेख का मिल जाना।
    दस्युवृत्ते यदि नरे शङ्का स्यात्तस्करेऽपि वा।
    यदि स्पृशेत् लेशेन कार्यः स्याच्छपथं ततः ॥ 12 ॥
    राजा को समाज के किसी भी व्यक्ति से चोरी-डाके से सम्बन्धित व्यक्ति के
    नारदस्मृति / 265