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नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

by देवर्षि नारद

Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished304 pages

Page 213 of 304

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Page 213

उद्यान तथा निर्जन वन। इन स्थानों में परिचितों के मिलने की कम सम्भावना रहती
है।
स्मृतिकारों के अनुसार प्रेमी युगल (युवक-युवती) इन स्थानों को अपनी
प्रणयलीला के लिए सुरक्षित पाते हैं। इन स्थानों पर सशंक रूप से घूमते हुए युगलों
को घर से भागे तथा अनुचित चेष्टारत मानकर पकड़ लेना चाहिए।
दूतीप्रस्थापनैर्वापि लेखसम्प्रेषणैरपि।
अन्यैश्च विविधैर्दोषैर्ग्राह्यं संग्रहणं बुधैः ॥ 64 ॥
बुद्धिमानों को किसी युवक-युवती को एक-दूसरे के पास सन्देशवाहक को
भेजते अथवा उसके स्वागत पत्रों का आदान-प्रदान करते तथा इस प्रकार के
अन्यान्य गुप्त एवं दूषित चेष्टाएं देखकर दोनों की एक-दूसरे में अनुरक्ति-आसक्ति
समझकर उन्हें पकड़ लेना चाहिए।
स्त्रियं स्पृशेददेशे यः स्पृष्टो वा मर्षयेत्तथा।
परस्परस्यानुमतं सर्वं संग्रहणं स्मृतम् ॥ 65 ॥
पुरुष और स्त्री को एक-दूसरे के गुप्त अंगों को स्पर्श करते हुए अथवा एक-
दूसरे के द्वारा किये जा रहे स्पर्श का निवारण न करते हुए, अपितु उलटे प्रोत्साहन
(आंखें मटकाना, हंसना, मुख से सीटी बजाना, उछलना, गुदगुदाना, गीत गाना,
रोमाञ्चित होना तथा सीत्कारना आदि) देते हुए देखकर उन्हें परस्पर अनुरक्त मानते
हुए पकड़ा जा सकता है।
उपकारक्रिया केलिः स्पर्शो भूषणवाससाम्।
सहखट्वासनं चैव सर्वं संग्रहणं स्मृतम् ॥ 66 ॥
प्रसन्न भाव से एक-दूसरे को अंगवस्त्रों का आदान-प्रदान, एक-दूसरे से
हास-परिहास तथा उनकी प्रशंसा के बहाने एक-दूसरे के अंगों को छूना तथा दोनों
का एक ही आसन पर एक-दूसरे के साथ सटकर बैठना आदि एक-दूसरे के प्रति
आकर्षण एवं अनुराग वृद्धि के लक्षण हैं।
पाणौ यश्च निगृह्णीयाद्वेण्यां वस्त्राञ्चलेऽपि वा।
तिष्ठ तिष्ठेति वा ब्रूयात् सर्वं संग्रहणं स्मृतम् ॥ 67 ॥
युवक द्वारा युवती के वस्त्रों व उसकी वेणी आदि को अपने हाथों में हलके
से खींचना-झटकना और युवती द्वारा कृत्रिम क्रोध से मुसकराते हुए—ठहर, अभी
तुझे मज़ा चखाती हूं—कहना और उसके पीछे भागना आदि चेष्टाएं दोनों की
पारस्परिक अनुरक्ति के लक्षण हैं।
वस्त्रैराभरणैर्माल्यैः पानैर्भक्ष्यस्तथैव च।
सम्प्रेष्यमाणैर्गन्धैश्च वेद्यं संग्रहणं बुधैः ॥ 68 ॥
प्रेमी-प्रेमिका को एक-दूसरे के पास वस्त्रों, आभूषणों, पुष्पमालाओं, पेयपदार्थों,
नारदस्मृति / 211