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नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

by देवर्षि नारद

Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished304 pages

Page 206 of 304

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Page 206

वाले पुरुष को इच्छा न होने पर भी उससे विवाह करना पड़ता है।
दीर्घकुत्सितरोगार्ता व्यङ्गा संसृष्टमैथुना।
धृष्टान्यगतभावा च कन्यादोषाः प्रकीर्तिताः ॥ 36 ॥
कन्या को अग्राह्य बनाने वाले दोष निम्नलिखित हैं—

  1. दीर्घकाल से चले आ रहे असाध्य रोग से ग्रस्त—दमा, राजयक्ष्मा,
    कैंसर आदि से पीड़ित।
  2. कुत्सित रोग से ग्रस्त—कोढ़, सफ़ेद दाग, दाद खुजली आदि चर्म रोगों
    की शिकार।
  3. आर्त्ता—मासिक धर्म आने पर असह्य पीड़ा से कराहने वाली, क्षुधा-
    पीड़ित तथा दारिद्र्य की प्रतिमूर्ति।
  4. व्यंगा—विकलांग—अन्धी, काणी, भैंगी, लंगड़ी, कुबड़ी, टेढ़े-मेढ़े हाथ-
    पांव वाली।
  5. संसृष्ट मैथुना—विवाह से पूर्व ही पुरुष से सम्बन्ध रखने वाली,
    व्यभिचारिणी।
  6. धृष्टा—ढीठ, निर्लज्ज, अनुचित एवं अश्लील विषयों में रुचि लेने वाली,
    मर्यादा की रक्षा न करने वाली तथा दुस्साहस करने वाली।
  7. अन्यगतभावा—पुरुषों से प्रीति एवं मित्रता करने वाली, आज की भाषा
    में ब्वायफ्रेण्ड बनाने वाली !
    उन्मत्तः पतितः क्लीबो दुर्भगस्त्यक्तबान्धवः।
    कन्यादोषौ च यौ पूर्वावेषं दोषगणो वरे ॥ 37 ॥
    इसी प्रकार वर को अवरणीय बनाने वाले दोष निम्नलिखित हैं—
  8. उन्मत्त—मस्तिष्क का सन्तुलित न होकर विकारग्रस्त होना। शरीर में
    वात, पित्त तथा कफ के विकार से, धन के विनाश से तथा सन्निपात ज्वर से प्रायः
    मन अस्थिर और मस्तिष्क विकृत हो जाता है।
  9. पतित—निकृष्ट कर्मों के कारण जाति से बहिष्कृत तथा धर्मानुष्ठान आदि
    के अयोग्य घोषित।
  10. क्लीव—नपुंसक, रति भोग में असमर्थ।
  11. दुर्भग—स्त्रियों के बदले समलिंगियों अथवा पशुओं से अथवा स्त्रियों के
    भग के स्थान पर उनकी गुदा या मुख में मैथुन करने वाला।
  12. त्यक्त बान्धव—जिसके अवगुणों (दोषों) के कारण बन्धु बान्धवों ने
    उससे नाता ही तोड़ लिया है।
  13. रोगग्रस्त—पुराने असाध्य रोग से पीड़ित तथा
  14. विकलांग—शरीर के किसी अंग से असामान्य।
    204 / नारदस्मृति