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नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

by देवर्षि नारद

Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished304 pages

Page 184 of 304

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Page 184

1/8 भाग देय होता है। यदि इस बीच वस्त्र फट जाता है, तो उसके विषय में शास्त्र
में कोई व्यवस्था नहीं है, अर्थात् क्रेता विक्रेता अपनी समझ से कुछ लेन-देन करते
हैं, तो ठीक और नहीं करते हैं, तो भी ठीक है। कानून इस सम्बन्ध में विक्रेता को
बाध्य नहीं करता।
लोहानामपि सर्वेषां हेतुर्ग्निक्रियाविधौ।
क्षयः संस्क्रियमाणानां तेषां दृष्टोऽग्निसंगमात् ॥ 10 ॥
लौह, रजत व स्वर्ण आदि धातुओं की शुद्धि की परख उन्हें आग में डालकर
तपाने से होती है। इस अग्नि-क्रिया में उसमें जुड़ी दूसरी धातु का क्षय हो जाता है
और मूल धातु अपने शुद्ध रूप में बच जाती है। अग्नि में हुई शुद्धि के उपरान्त लौह
आदि धातुओं का वजन करना चाहिए। अग्नि-संयोग से किस धातु का कितना
क्षय होता है—इसका विवरण अगले पद्यों में प्रस्तुत किया जा रहा है।
सुवर्णस्य क्षयो नास्ति राजते द्विपलं शतम्।
शतमष्टपलं ज्ञेयं क्षयस्तु त्रपुसीसयोः ॥ 11 ॥
ताम्रे पञ्चपलं विद्याद्विकारा ये च तन्मयाः।
तद्धातूनामनेकत्वादयसोऽनियमः क्षये ॥ 12 ॥
अग्नि-क्रिया—अग्नि में जलाने तपाने पर स्वर्ण का कुछ भी अंश नष्ट
नहीं होता। चांदी का दो प्रतिशत, सीसे और त्रपु (रांगा) का आठ प्रतिशत और
तांबे का पांच प्रतिशत नष्ट होता है। इसके साथ तांबा आदि में थोड़ा विकार-
परिवर्तन भी आ जाता है। वस्तुतः धातुओं की संख्या और उनके प्रकार-भेदों की
अनेकता के कारण सभी के क्षय के सम्बन्ध में निश्चित रूप से कुछ कहना सम्भव
नहीं। अभिप्राय यह है कि तांबे का अग्नि क्रिया में वैसे तो पांच प्रतिशत क्षय होता
है, परन्तु उसके विभिन्न प्रकारों में क्षय की मात्रा न्यूनाधिक भी हो सकती है। अतः
किसी स्थिर नियम का उल्लेख नहीं किया जा सकता।
तान्तवस्य च संस्कारे क्षयवृद्धि उदाहृते।
सूत्रकार्पासिकोर्णानां वृद्धिर्दशपलं शतम् ॥ 13 ॥
चादर, शाल और कम्बल आदि वस्त्रों के बनाने में प्रयुक्त होने वाले कपास,
पश्मीना तथा ऊन आदि के धागे का संस्कार करने पर उनमें दस प्रतिशत की वृद्धि
हो जाती है।
स्थूलसूत्रवतां तेषां मध्यानां पञ्चकं शतम्।
त्रिपलं तु सुसूक्ष्माणामेषा वृद्धिरुदाहृता ॥ 14 ॥
इसी प्रकार मोटे धागे से बने वस्त्रों की वृद्धि दस प्रतिशत होती है, मध्यम
स्तर के मोटे धागे से बने वस्त्रों में यह वृद्धि पांच प्रतिशत और सूक्ष्म तन्तुओं से बने
वस्त्रों में यह वृद्धि तीन प्रतिशत रह जाती है।
182 / नारदस्मृति