नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
by देवर्षि नारद
Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)
DevanagariSanskritpublished304 pages
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- हाथ में शस्त्र लिये रहने पर पकड़ा जाने वाला हत्यारा है।
- हाथ में स्त्री के सिर के केश, वस्त्र, गन्ध आदि लिये रहने वाला परस्त्रीगामी
है। - तोड़-फोड़ के औज़ारों के साथ पकड़ा जाने वाला सेतुभञ्जक है।
- कुल्हाड़ी आदि के साथ पकड़ा जाने वाला वृक्षों को काटने वाला है तथा
- तमतमाये चेहरे वाला दूसरों से मार-पीट करने वाला है।
इस प्रकार के चिह्नों को देखकर किसी अन्य साक्ष्य की अपेक्षा किये बिना
इन अपराधियों को तत्काल यथोचित दण्ड देना चाहिए।
कुद्दालपाणिर्विज्ञेयः सेतुभेत्ता समीपगः।
तथाकुठारपाणिश्च वनच्छेत्ता प्रकीर्तितः ॥ 174 ॥
स्मृतिकार इस सम्बन्ध में कुछ सावधानी बरतने की चेतावनी देते हुए कहता
है—कभी-कभी फावड़ा हाथ में लिये किसी पुल के पास दीखने वाला व्यक्ति
पुलिया का रक्षक—टूट-फूट की मरम्मत करने वाला—और कुल्हाड़ी हाथ में
लिये रहने वाला वृक्षों को काटने वाला समझ लिया जाता है। यह धारणा सही हो
भी सकती है और सही नहीं भी हो सकती है। अतः सत्य के निर्णय के लिए
सतर्कता अपेक्षित रहती है।
प्रत्यक्षचिह्नो विज्ञेयो दण्डपारुष्यकृन्नरः।
असाक्षिप्रत्यया ह्येते पारुष्ये तु परीक्षणम् ॥ 175 ॥
वस्तुतः अपराधी के चेहरे के हाव-भावों, उसकी चेष्टाओं व उसके छिपने के
प्रयास आदि प्रत्यक्ष चिह्नों से उसके अपराधी होने का अनुभव हो जाता है, फिर भी
सत्य को सुनिश्चित करने के लिए थोड़ी-बहुत पूछताछ अवश्य करनी चाहिए।
'असत्य के पांव नहीं होते' उक्ति के अनुसार अपराध को छिपाना सम्भव
नहीं होता और वास्तविकता सामने आ ही जाती है, फिर भी कुछ लोग जहां अपेक्षा
से अधिक चतुर होते हैं, वहां कुछ लोग अत्यधिक भोले और सीधे-सादे होते हैं।
अतः जांच-परख करना आवश्यक हो जाता है।
कश्चित्कृत्वाऽऽत्मनश्चिह्नं द्वेषात् परमुपद्रवेत्।
हेत्वर्थगतिसामथ्र्यैस्तत्र युक्तं परीक्षणम् ॥ 176 ॥
कभी-कभी ऐसा भी होता है कि कुछ चतुर एवं धूर्त लोग द्वेषवश किसी को
फंसाने के लिए अपने शरीर पर कुछ कृत्रिम चिह्न बना देते हैं अथवा प्रताड़ित-
पीड़ित सरीखी चेष्टाएं अथवा प्रदर्शन करने लगते हैं। इस स्थिति में वास्तविकता
का निर्णय करने के लिए हेतु (कारण), प्रयोजन, सामर्थ्य और गति के आधार पर
जांच करनी चाहिए, अर्थात् यह देखना चाहिए कि अपराध का कारण क्या हो
सकता है ? उद्देश्य अथवा प्रयोजन क्या हो सकता है ? अपराधी में अपराध करने
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